तेहरान/काबुल: ईरान में आर्थिक हालात बिगड़ने के बीच वहां रह रहे बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों के सामने रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट गहराता जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, हजारों अफगान प्रवासी ईरान छोड़कर अफगानिस्तान लौट रहे हैं। इनमें कई ऐसे परिवार भी शामिल हैं, जिन्होंने वर्षों तक ईरान में रहकर काम किया और अपने परिवार का खर्च चलाया। ईरान में बढ़ती महंगाई और मुद्रा की कमजोरी का सीधा असर प्रवासी मजदूरों की आमदनी और बचत पर पड़ा है। Reuters की 17 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, वार्षिक महंगाई करीब 90 प्रतिशत तक पहुंचने और खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगभग 130 प्रतिशत तक बढ़ोतरी ने कई परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च उठाना मुश्किल कर दिया है। कुछ अफगान प्रवासियों ने महीनों तक काम नहीं मिलने और मजदूरी का भुगतान अटकने की भी बात कही है। कई परिवारों के पास ईरान में रहने के लिए पर्याप्त आर्थिक साधन नहीं बचे हैं। ऐसे में कुछ लोग मजबूरी में अपने सामान और बचत का बड़ा हिस्सा पीछे छोड़कर अफगानिस्तान लौट रहे हैं। ईरान की मौजूदा आर्थिक परेशानी के पीछे केवल महंगाई ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता भी महत्वपूर्ण कारक हैं। हालिया रिपोर्ट में ईरान में बढ़ते संघर्ष और उसके आर्थिक प्रभाव को अफगान प्रवासियों की बिगड़ती स्थिति से जोड़ा गया है। ईरान लंबे समय से लाखों अफगान नागरिकों और शरणार्थियों की मेजबानी करता रहा है। इनमें कुछ लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग तरह की कानूनी या अस्थायी स्थिति में रह रहे हैं। बदलते हालात के कारण कई लोगों पर वापस लौटने का दबाव बढ़ा है। ईरान में काम करने वाले अफगान नागरिक मुख्य रूप से निर्माण, कृषि, छोटे कारोबार और मजदूरी जैसे क्षेत्रों पर निर्भर रहे हैं। आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी आने पर सबसे पहले कम आय वाले श्रमिकों पर असर पड़ता है। कुछ लौटने वाले प्रवासियों का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक नियमित काम नहीं मिला। जिन लोगों को रोजगार मिला भी, उनमें से कुछ को मजदूरी मिलने में देरी का सामना करना पड़ा। ऐसे हालात में परिवारों की बचत तेजी से खत्म हुई और ईरान में रहना पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो गया। वापसी का मौजूदा दौर केवल अकेले पुरुष मजदूरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों में पूरे परिवारों के अफगानिस्तान लौटने की बात सामने आई है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। कुछ परिवार ऐसे हैं जिनके बच्चों ने अपना अधिकांश जीवन ईरान में बिताया है और अफगानिस्तान उनके लिए पूरी तरह नया वातावरण है। सितंबर में अफगान अधिकारियों की ओर से जारी आंकड़ों में भी ईरान और पाकिस्तान से लौटने वाले परिवारों की लगातार आमद दिखाई गई। उदाहरण के लिए, 14 सितंबर को 250 परिवारों के 1,083 लोगों के लौटने की सूचना दी गई, जबकि 15 सितंबर को 148 परिवारों के 671 लोगों की वापसी दर्ज की गई। ये आंकड़े दोनों देशों से लौटने वालों को मिलाकर हैं, इसलिए इन्हें केवल ईरान से लौटे लोगों का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। ईरान छोड़कर अफगानिस्तान पहुंचने के बाद भी इन परिवारों की परेशानियां खत्म नहीं होतीं। देश में रोजगार के अवसर सीमित हैं और बड़ी संख्या में लौटने वाले लोगों के लिए घर, भोजन, स्वास्थ्य सेवा तथा आय का स्थायी साधन जुटाना चुनौती बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों ने भी बड़े पैमाने पर हो रही वापसी को अफगानिस्तान के लिए गंभीर मानवीय और पुनर्वास चुनौती बताया है। मई 2026 में UNAMA ने बताया था कि सितंबर 2023 से लगभग 5.9 मिलियन अफगान ईरान और पाकिस्तान से वापस लौट चुके थे। संगठन ने अप्रैल से दिसंबर 2026 के बीच लगभग 2.7 मिलियन और लोगों के लौटने की स्थिति से निपटने के लिए 529 मिलियन डॉलर की प्रतिक्रिया योजना शुरू की थी। वापस लौटने वाले परिवारों में महिलाओं और बच्चों की स्थिति विशेष चिंता का विषय है। Reuters के अनुसार, कुछ परिवारों की युवा बेटियों ने ईरान में शिक्षा हासिल की थी, लेकिन अफगानिस्तान लौटने के बाद उनके लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर सीमित हो सकते हैं। इससे परिवारों के पुनर्वास की समस्या केवल आर्थिक नहीं रह जाती, बल्कि शिक्षा और भविष्य की आजीविका से भी जुड़ जाती है। अफगानिस्तान लौटने वाले कुछ पात्र लोगों को संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और सहयोगी संगठनों से सहायता दी जा रही है। UNHCR के अनुसार, 23 मार्च 2026 से ईरान से लौटने वाले कुछ श्रेणियों के अफगानों के लिए नकद सहायता, स्वास्थ्य सेवाएं, अस्थायी आवास, टीकाकरण, सुरक्षा संबंधी सलाह और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। IOM ने भी ईरान-अफगानिस्तान मार्ग पर प्रवास और वापसी के दबाव को लेकर विशेष निगरानी की है। उसके विश्लेषण में आर्थिक परिस्थितियों, रोजगार, आवाजाही और वापस लौटने के बाद परिवारों के पुनर्वास से जुड़े जोखिमों को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया है। अफगान प्रवासियों की बड़े पैमाने पर वापसी का असर केवल लौटने वाले परिवारों तक सीमित नहीं है। ईरान में लंबे समय से काम कर रहे अफगान नागरिक अपने परिवारों को पैसे भेजते रहे हैं। अगर बड़ी संख्या में लोग वापस लौटते हैं और उनकी आय खत्म हो जाती है, तो इन परिवारों की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ अफगानिस्तान में स्थानीय समुदायों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, ईरान में आर्थिक संकट और श्रम बाजार पर दबाव से कम आय वाले प्रवासियों की स्थिति और कठिन हो सकती है। इस तरह मौजूदा घटनाक्रम अफगानिस्तान के मानवीय संकट, रोजगार की कमी और प्रवासन की समस्या को एक-दूसरे से जोड़ रहा है। ईरान से अफगान नागरिकों की बढ़ती वापसी क्षेत्र में बदलती आर्थिक और मानवीय परिस्थितियों का संकेत है। महंगाई, कमजोर होती आमदनी, रोजगार की कमी और प्रवासन नीतियों से पैदा दबाव ने कई परिवारों को वापसी का रास्ता चुनने पर मजबूर किया है। लेकिन अफगानिस्तान में लौटने के बाद रोजगार, आवास, शिक्षा और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता इन परिवारों के लिए अगली बड़ी चुनौती बनी हुई है।महंगाई ने तोड़ी परिवारों की आर्थिक कमर
संघर्ष और अस्थिरता ने बढ़ाया दबाव
सिर्फ आर्थिक नहीं, रोजगार का भी संकट
सीमा पर पहुंच रहे पूरे परिवार
अफगानिस्तान में भी आसान नहीं होगी वापसी
महिलाओं और बच्चों के सामने अलग चुनौतियां
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां दे रही सहायता
संकट का असर दोनों देशों पर
निष्कर्ष
ईरान से अफगान प्रवासियों की वापसी तेज, आर्थिक संकट ने बढ़ाई मुश्किलें






