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खगौल ट्रेन लूटकांड का मुख्य आरोपी रोहित तिवारी वाराणसी से गिरफ्तार, यात्रियों को पुलिस बनकर डराने का आरोप


पटना/वाराणसी। चलती ट्रेनों में यात्रियों को कथित तौर पर डराकर पैसे वसूलने, लूटपाट करने और विरोध करने वालों को ट्रेन से नीचे धकेलने के मामलों की जांच कर रही रेल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे रोहित तिवारी उर्फ गुड्डू तिवारी को वाराणसी के मोहनसराय इलाके से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी कभी खुद को पुलिस, कभी आरपीएफ और कभी एसटीएफ का जवान बताकर यात्रियों पर दबाव बनाता था।

यात्रियों को पुलिसकर्मी बताकर करता था डराने का आरोप

रेल पुलिस के अनुसार, रोहित तिवारी पैसेंजर ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को निशाना बनाता था। वह खुद को पुलिस या सुरक्षा बल का कर्मचारी बताकर टिकट जांच, धूम्रपान या कथित नियम उल्लंघन के नाम पर रुपये मांगता था।

पुलिस का कहना है कि उसके निशाने पर खास तौर पर मजदूर, कम उम्र के यात्री और ऐसे लोग रहते थे, जो अकेले सफर कर रहे हों। रुपये देने से इनकार करने पर उनके साथ मारपीट या जबरदस्ती करने के आरोप भी जांच में सामने आए हैं।

6 सितंबर की घटना ने जांच को आगे बढ़ाया

पुलिस के मुताबिक, 6 सितंबर को बक्सर से पटना लौट रहे कैलाश कुमार और रितेश कुमार भी कथित तौर पर आरोपी के निशाने पर आए थे। आरोप है कि कैलाश के साथ लूटपाट करने के बाद उसके हाथ-पैर बांध दिए गए और उसे बिहटा-सदीसोपुर के बीच चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया।

इसके बाद रितेश को भी ट्रेन से बाहर धकेलने की बात सामने आई। इस घटना में रितेश घायल हुआ और उसने पुलिस को आरोपी की पहचान तथा घटनाक्रम से संबंधित अहम जानकारी दी। इसी सुराग से जांच टीम को आगे बढ़ने में मदद मिली।

नितिन की मौत के मामले में भी आरोपी पर गंभीर आरोप

जांच का सबसे गंभीर पहलू 19 सितंबर की घटना से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, हैदराबाद से दानापुर लौट रहे नितिन कुमार को आरोपी ने कथित तौर पर पैसे मांगने के दौरान निशाना बनाया और चलती ट्रेन से नीचे धकेल दिया। इस घटना में नितिन की मौत हो गई।

पुलिस का दावा है कि घटना के बाद आरोपी ने नितिन के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर उसके परिजनों से संपर्क किया। खुद को एसटीएफ कर्मी बताते हुए पहले पांच हजार और बाद में 12 हजार रुपये मांगने की बात भी जांच में सामने आई है।

फुलवारी शरीफ की घटना भी जांच के दायरे में

रेल पुलिस अब आरोपी को सिर्फ एक मामले तक सीमित करके नहीं देख रही है। जांच के दौरान फुलवारी शरीफ इलाके में आरा निवासी मनीष कुमार को ट्रेन से नीचे फेंके जाने की घटना में भी रोहित तिवारी की कथित भूमिका की जांच की जा रही है।

पुलिस को अलग-अलग घटनाओं में आरोपी के कथित तौर-तरीकों में समानता मिली है। इसी आधार पर पुराने रेल अपराधों और अन्य संदिग्ध घटनाओं की कड़ियां भी खंगाली जा रही हैं।

तकनीकी जांच से मोहनसराय तक पहुंची पुलिस

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए रेल पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की। पटना, आरा और बक्सर सहित अलग-अलग स्थानों पर तलाश के बाद तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूचना के आधार पर पुलिस को उसके वाराणसी के मोहनसराय में होने की जानकारी मिली।

इसके बाद रेल पुलिस की टीम ने वहां कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके मोबाइल फोन, संपर्कों तथा पहले सामने आए मामलों से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।

दो अन्य लोगों से भी पूछताछ

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने आरोपी के संपर्क में रहने वाले दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित वारदातों में रोहित के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

इसके साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि आरोपी ने किन-किन ट्रेनों और रेल मार्गों पर यात्रियों को निशाना बनाया था और कथित तौर पर लूटा गया सामान कहां पहुंचाया जाता था।

कई पुराने मामलों की भी पड़ताल

रेल पुलिस के अनुसार, रोहित तिवारी के खिलाफ पहले से भी रेल अपराध से जुड़े मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। जांच टीम अब उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और पूर्व में दर्ज मामलों को मौजूदा घटनाओं से जोड़कर देख रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी ने इसी तरह की अन्य घटनाओं को अंजाम दिया था, लेकिन वे अब तक पुलिस रिकॉर्ड में सामने नहीं आई हैं।

यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल

चलती ट्रेन में यात्रियों को कथित तौर पर धमकाकर पैसे वसूलने और उन्हें बाहर धकेलने जैसे आरोपों ने रेल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े किए हैं। खासकर रात में और कम भीड़ वाली पैसेंजर ट्रेनों में अकेले सफर करने वाले यात्रियों के लिए ऐसी घटनाएं चिंता का विषय बन सकती हैं।

अब पुलिस की जांच का अगला चरण यह पता लगाना है कि आरोपी के खिलाफ सामने आए सभी मामलों में उसके विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य कितने मजबूत हैं और किन घटनाओं में उसकी भूमिका साबित होती है।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही है। जांच टीम कथित घटनाओं के समय की लोकेशन, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, पीड़ितों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान करेगी।

इसके आधार पर उन मामलों की भी पहचान की जा सकती है, जिनमें आरोपी की भूमिका होने का संदेह है। फिलहाल किसी अतिरिक्त घटना को आरोपी से जोड़ने से पहले पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

निष्कर्ष

रोहित तिवारी उर्फ गुड्डू तिवारी की वाराणसी के मोहनसराय से गिरफ्तारी को रेल पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर चलती ट्रेनों में यात्रियों से पैसे वसूलने, लूटपाट करने और विरोध करने वाले यात्रियों को ट्रेन से बाहर धकेलने जैसे गंभीर आरोप हैं। अब पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसके खिलाफ सामने आए मामलों की पूरी कड़ी क्या है और क्या इनमें अन्य लोग भी शामिल थे।

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