परिसीमन में आदिवासी सीटों की संख्या घटने की आशंका के विरुद्ध सुमन तिर्की के नेतृत्व में पलामू से
जोरदार आदिवासी जुटान
मेदिनीनगर : परिसीमन के संभावित प्रभावों के चलते आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या कम होने की आशंका के विरोध में रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित आदिवासी महाजुटान रैली में पलामू से सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुषों ने भाग लेकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। पलामू जिला महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री श्रीमती सुमन तिर्की के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों का रांची पहुंचना आदिवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी सक्रिय प्रतिबद्धता का परिचायक है।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, प्रदेश कांग्रेस कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य एवं अधिवक्ता हृदयानंद मिश्र ने सुमन तिर्की को इस सफल एवं प्रभावशाली नेतृत्व के लिए बधाई देते हुए कहा कि कांग्रेस संगठन के साथ-साथ आदिवासी समाज के हितों के लिए उनका समर्पित संघर्ष अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सुमन तिर्की ने अपने निरंतर जनसंपर्क, संगठनात्मक सक्रियता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से पलामू में अपनी अलग पहचान बनाई है।
हृदयानंद मिश्र ने कहा कि सुमन तिर्की का संघर्ष केवल किसी एक राजनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वह लंबे समय से आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाती रही हैं। मोराबादी मैदान में पलामू से सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों को संगठित कर रांची ले जाना उनके बढ़ते जनाधार और संगठनात्मक क्षमता का स्पष्ट प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि इससे पूर्व हूल दिवस के अवसर पर भी सुमन तिर्की एवं जातरू उरांव के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी हुई थी। उक्त कार्यक्रम में झारखंड महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती रमा खलखो भी शामिल हुई थीं। हूल दिवस के कार्यक्रम में 740 महिलाओं और 257 पुरुषों की उल्लेखनीय भागीदारी इस बात का प्रमाण थी कि सुमन तिर्की की जनस्वीकार्यता लगातार मजबूत हो रही है।
हृदयानंद मिश्र ने कहा कि महिलाओं को संगठित करने और उन्हें सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों से जोड़ने में सुमन तिर्की की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनकी सक्रियता से महिला कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल रही है और आदिवासी समाज की महिलाओं में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आदिवासी समाज की आशंकाओं और चिंताओं को लोकतांत्रिक तरीके से सामने लाना समय की आवश्यकता है। झारखंड की पहचान, आदिवासी अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर व्यापक जनसंवाद होना चाहिए, ताकि किसी भी निर्णय में आदिवासी समाज के हितों की अनदेखी न हो।
हृदयानंद मिश्र ने सुमन तिर्की को व्यक्तिगत रूप से बधाई देते हुए कहा कि पलामू की धरती से महिलाओं एवं पुरुषों की इतनी बड़ी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित कर उन्होंने यह साबित किया है कि समर्पित कार्यकर्ता जब जनता के बीच लगातार सक्रिय रहता है तो संगठन के साथ-साथ उसका जनाधार भी मजबूत होता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुमन तिर्की भविष्य में भी कांग्रेस संगठन को मजबूत करने तथा आदिवासी समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।
— हृदयानंद मिश्र, अधिवक्ता
वरिष्ठ नेता, झारखंड प्रदेश कांग्रेस
सदस्य, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कोऑर्डिनेशन कमेटी





