कब तक कीचड़ में चलेंगे पंचायतवासी? सड़क के नाम पर वादे, मनरेगा में ₹4.62 लाख की निकासी का आरोप
दस गांवों और पांच टोलों को जोड़ने वाली सड़क बदहाल, अतिक्रमण और जलजमाव से ग्रामीण परेशान
पलामू : “सड़क है या कीचड़ का रास्ता?” पाण्डु प्रखंड अंतर्गत कजरू कला मुख्य मार्ग से झरिवा मुरली, केवाल, राजखाड़, आजाद नगर अमवादामर और घासीदाग-जमारी पंचायत समेत करीब दस गांवों और पांच टोलों को जोड़ने वाली सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सड़क पूरे वर्ष पानी और कीचड़ से लबालब रहती है, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
ग्रामीणों के अनुसार सर्वे नक्शे में सड़क की चौड़ाई करीब 40 से 70 फीट तक दर्ज है, जबकि जमीन पर कई जगह यह महज करीब 8 फीट की रह गई है। दोनों ओर कथित अतिक्रमण और घरों का पानी सड़क पर गिरने से जलनिकासी की समस्या और गंभीर हो गई है। ग्रामीणों ने कई बार बैठक कर सड़क पर पानी रोकने का प्रयास किया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
सबसे गंभीर आरोप वर्ष 2022-23 में स्वीकृत मनरेगा योजना को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि “नैका मियां के घर से धुरिया नदी तक मिट्टी-मोरम पथ निर्माण” के नाम पर योजना स्वीकृत हुई, लेकिन मौके पर काम दिखाई नहीं दिया और इसके बावजूद ₹4,62,405 की निकासी कर ली गई।
हालांकि इस वित्तीय अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि योजना की स्थलीय जांच, मापी, मस्टर रोल और भुगतान अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
*प्रतिनिधियों के लिए रास्ता भी बदल गया, ग्रामीणों की परेशानी नहीं*
ग्रामीणों का कहना है कि जब भी कोई जनप्रतिनिधि बिश्रामपुर प्रखंड के घासीदाग और राजखाड़ क्षेत्र में जाता है तो सड़क की खराब स्थिति के कारण रबरा-अमवादामर होकर निकलना पसंद करता है। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर सड़क इतनी खराब है कि जनप्रतिनिधि खुद उस रास्ते से गुजरना नहीं चाहते, तो वर्षों से आम जनता को उसी कीचड़ में चलने के लिए क्यों छोड़ दिया गया है?
ग्रामीणों के मुताबिक शादी-विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों में भी यह सड़क बड़ी बाधा बन रही है। बारिश के दिनों में स्थिति और बदतर हो जाती है।
लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अनशन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन सड़क की तस्वीर जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क से अतिक्रमण हटाकर जलनिकासी की व्यवस्था, सड़क की चौड़ाई की वास्तविक मापी और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण कराया जाए। साथ ही मनरेगा योजना में हुई कथित निकासी की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाए।
मौके पर गुलजार अंसारी, याकूब अली, महबूब अली, असगर अली, बशारत हुसैन, खलील अहमद, उम्मत रसूल सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।





