BREAKING NEWS

logo

नीलगाय बनी किसानों के लिए बड़ी समस्या, वन विभाग ने बनाई नई योजना


मो. सफी
पलामू: जिले में नीलगाय  किसानों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। जंगलों से निकलकर ये फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। हाल ही में वन विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में नीलगाय के व्यवहार और भोजन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिसके आधार पर अब दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

*सर्वे में सामने आई अहम जानकारी*
वन विभाग के सर्वे के अनुसार नीलगाय खैर और बेर के पेड़ों की पत्तियों को विशेष रूप से पसंद करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रभावित इलाकों में खैर और बेर के पौधारोपण की योजना बनाई जा रही है। पलामू के जंगल पहले से ही इन पेड़ों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं, ऐसे में यह उपाय दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकता है।

*वन समितियां करेंगी तत्काल राहत का काम*
जिले में लगभग 700 वन समितियां सक्रिय हैं, जिनमें से 57 समितियों को नीलगाय की समस्या से निपटने के लिए विशेष रूप से चुना गया है। इन समितियों को 1.57 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। यह समितियां विशेष अभियान चलाकर नीलगाय को जंगलों की ओर वापस भेजने में ग्रामीणों की मदद करेंगी। इस राशि का उपयोग हाथी से संबंधित समस्याओं के समाधान में भी किया जाएगा।

> डीएफओ सत्यम कुमार ने बताया कि नीलगाय को नियंत्रित करने के लिए वन समितियां सक्रिय भूमिका निभाएंगी और जंगलों में उपयुक्त पेड़ लगाने पर भी जोर दिया जाएगा।

*1.54 लाख हेक्टेयर भूमि प्रभावित*
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक पलामू जिले में लगभग 1.54 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि नीलगाय से प्रभावित है। सबसे ज्यादा असर हुसैनाबाद, हैदरनगर, मोहम्मदगंज, पांडू, बिश्रामपुर, उंटारी, सदर प्रखंड, छतरपुर और नावाबाजार क्षेत्रों में देखा गया है। सोन और कोयल नदी के किनारे वाले इलाकों में नीलगाय की संख्या अधिक पाई गई है।

*मवेशियों के कारण बढ़ रही समस्या*
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जंगलों के आसपास बड़ी संख्या में मवेशी मौजूद हैं, जो नीलगाय का प्राकृतिक भोजन खा जाते हैं। भोजन की कमी के कारण नीलगाय खेतों की ओर रुख करती है और फसलों को नुकसान पहुंचाती है।

*मुआवजा और दुर्घटनाओं का मुद्दा*
वित्तीय वर्ष 2024-25 में नीलगाय द्वारा फसल नुकसान के मामलों में वन विभाग ने 62.7 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। प्रति हेक्टेयर मुआवजा 10,833 रुपये से 21,666 रुपये तक निर्धारित है। इसके अलावा कई किसान सड़कों पर नीलगाय की वजह से दुर्घटनाओं का शिकार भी हो चुके हैं।

*संसद और विधानसभा तक पहुंचा मामला*
नीलगाय की समस्या लोकसभा और झारखंड विधानसभा में भी कई बार उठ चुकी है। हर सत्र में पलामू क्षेत्र में किसानों को हो रहे नुकसान पर चर्चा होती रही है।

*दीर्घकालिक समाधान पर काम जारी*
वन विभाग सर्वे रिपोर्ट के आधार पर वर्किंग प्लान तैयार कर रहा है, जिसमें जंगलों में पानी के स्रोत बढ़ाने, घास की उपलब्धता सुनिश्चित करने और नीलगाय के आवागमन को नियंत्रित करने जैसे उपाय शामिल होंगे। यह समस्या मानव-वन्यजीव संघर्ष का हिस्सा है, जिसमें पत्थर खनन और अन्य गतिविधियों के कारण जंगलों का दायरा भी प्रभावित हो रहा है।

> वन विभाग की नई योजना और वन समितियों की सक्रियता से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में नीलगाय की समस्या से किसानों को राहत मिलेगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी।