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SEBI की बड़ी कार्रवाई: Prrsaar Sampada और Chaubara Eats पर डेरिवेटिव्स में कथित हेरफेर का आरोप


मुंबई: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में कथित cross-segment price manipulation के मामले में दो संस्थाओं—Prrsaar Sampada Private Limited और Chaubara Eats Private Limited—के खिलाफ कड़ी अंतरिम कार्रवाई की है। नियामक ने दोनों संस्थाओं और उनसे जुड़े चार व्यक्तियों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया है तथा कथित गलत तरीके से हासिल किए गए करीब ₹28.12 करोड़ के लाभ को जांच पूरी होने तक impound यानी जब्त रखने का निर्देश दिया है।

NSE की निगरानी से सामने आया मामला

SEBI की कार्रवाई के पीछे National Stock Exchange (NSE) की ओर से की गई ट्रेडिंग गतिविधियों की समीक्षा भी अहम बताई गई है। NSE के विश्लेषण में Prrsaar Sampada की ट्रेडिंग में एक असामान्य पैटर्न सामने आया था। नियामक के अनुसार, कंपनी को स्टॉक ऑप्शंस में असामान्य रूप से अधिक लाभ होता था, जबकि स्टॉक फ्यूचर्स में नुकसान दर्ज किया जा रहा था।

NSE ने फरवरी और मार्च 2026 में Prrsaar Sampada से इस गतिविधि को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। SEBI के अनुसार, इसके बाद Prrsaar की proprietary trading गतिविधि में काफी कमी आई, जबकि संबंधित कंपनी Chaubara Eats की ऐसी गतिविधि बढ़ गई। नियामक ने इसी पैटर्न को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना।

कैसे किया गया कथित हेरफेर?

SEBI के प्रारंभिक निष्कर्ष के मुताबिक, दोनों संस्थाओं ने स्टॉक फ्यूचर्स और ऑप्शंस के बीच कीमतों के संबंध का इस्तेमाल करके कथित तौर पर लाभ कमाने की रणनीति अपनाई।

आरोप के अनुसार, पहले फ्यूचर्स सेगमेंट में बड़े और आक्रामक ऑर्डर लगाए जाते थे। ये ऑर्डर कई बार मौजूदा Last Traded Price (LTP) से ऊपर खरीद या LTP से नीचे बिक्री के रूप में होते थे। इससे फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की कीमत में तेज बदलाव आता था।

इसके समानांतर ऑप्शंस सेगमेंट में पहले से ऐसी पोजीशन बनाई जाती थी, जिससे फ्यूचर्स की कीमत में होने वाला बदलाव ऑप्शंस ट्रेड के लिए अनुकूल हो सके। SEBI के अनुसार, फ्यूचर्स की कीमत में बदलाव का असर संबंधित ऑप्शंस की कीमत पर पड़ता था और इससे पहले से लगाए गए ऑप्शंस ऑर्डर अनुकूल कीमतों पर निष्पादित हो जाते थे।

कुछ समय बाद पोजीशन उलटने का आरोप

नियामक के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के बाद संबंधित संस्थाएं थोड़े समय के भीतर फ्यूचर्स और ऑप्शंस में विपरीत दिशा की पोजीशन लेकर पहले किए गए लेनदेन को reverse कर देती थीं।

SEBI ने इसे cross-segment manipulation का संभावित तरीका माना है, क्योंकि कथित रणनीति में फ्यूचर्स की कीमत को प्रभावित करने के बाद उसी प्रभाव का फायदा ऑप्शंस सेगमेंट में उठाने का आरोप है।

23 ट्रेडिंग घटनाओं की जांच

SEBI ने अक्टूबर 2025 से जून 2026 के बीच की गतिविधियों की जांच की। नियामक ने कुल 23 profit-scrip days का उल्लेख किया—इनमें 13 मामले Prrsaar Sampada और 10 मामले Chaubara Eats से जुड़े बताए गए हैं। जांच में कुछ डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स, जिनमें KFin Technologies और Swiggy से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल बताए गए हैं, की गतिविधियों की समीक्षा की गई।

SEBI के मुताबिक, संबंधित संस्थाओं ने अपेक्षाकृत कम बाजार पूंजीकरण वाले कुछ शेयरों में ऐसी गतिविधियां कीं, जहां सीमित पूंजी से कीमतों पर असर डालना अपेक्षाकृत आसान हो सकता था।

₹28.12 करोड़ के कथित लाभ पर रोक

नियामक ने दोनों संस्थाओं से जुड़े कथित wrongful gains को impound करने का निर्देश दिया है। रकम करीब ₹28.12 करोड़ बताई गई है। यह कार्रवाई जांच पूरी होने तक कथित लाभ को अलग रखने के उद्देश्य से की गई है।

यह रकम अभी अंतिम रूप से दंड के तौर पर निर्धारित नहीं हुई है। SEBI की विस्तृत जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

छह लोगों पर भी कार्रवाई

SEBI की अंतरिम कार्रवाई केवल दोनों कंपनियों तक सीमित नहीं है। नियामक ने Prrsaar Sampada और Chaubara Eats से जुड़े चार निदेशकों समेत कुल छह पक्षों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया है। Prrsaar Sampada पर लगी रोक उसके proprietary account से संबंधित बताई गई है। कंपनी broker के साथ-साथ depository participant और research analyst के रूप में भी पंजीकृत है।

SEBI की जांच अभी जारी

SEBI ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि दोनों संस्थाओं के बीच संभावित coordinated या synchronised trading समेत अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है। नियामक की मौजूदा कार्रवाई को निवेशकों के हितों और बाजार की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अंतरिम कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

SEBI की आधिकारिक वेबसाइट पर 16 सितंबर 2026 को इस मामले से संबंधित “Ex-Parte Interim Order” दर्ज है। इसका मतलब है कि यह फिलहाल नियामक की अंतरिम कार्यवाही है और मामले में आगे की जांच तथा प्रक्रिया के बाद स्थिति में बदलाव संभव है।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि शेयर बाजार में केवल किसी कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री ही नहीं, बल्कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस के बीच कीमतों के संबंध का दुरुपयोग भी नियामकीय जांच के दायरे में आता है।

SEBI की कार्रवाई यह भी दिखाती है कि एक्सचेंज और नियामक असामान्य ट्रेडिंग पैटर्न की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि इस मामले में अंतिम जिम्मेदारी और संभावित दंड का निर्धारण विस्तृत जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।