नई दिल्ली: भारत और ओमान के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए नई पहल सामने आई है। ओमान भारतीय कंपनियों और कारोबारियों को अपने ports, free zones और industrial areas के जरिए न केवल ओमान बल्कि पूरे Middle East और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने के अवसरों की जानकारी दे रहा है। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय कारोबारी रोडशो में भारतीय निर्माताओं, निर्यातकों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के साथ संभावित निवेश और साझेदारी पर चर्चा हुई। रोडशो में Sohar Port and Freezone को खास तौर पर भारतीय कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्र के रूप में पेश किया गया। ओमान के राजदूत Issa Saleh Abdullah Alshibani ने कहा कि Sohar समेत देश के अन्य बंदरगाह भारतीय विनिर्माण कंपनियों को ओमान, Middle East और व्यापक क्षेत्र में विस्तार के लिए एक संभावित गेटवे उपलब्ध करा सकते हैं। Sohar Port and Freezone में औद्योगिक गतिविधियों, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में 30 अरब डॉलर से अधिक का कुल निवेश आकर्षित हुआ है और यहां सालाना 72 मिलियन टन से अधिक कार्गो संभाला जाता है। भारत और ओमान के बीच Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) 1 जून 2026 से लागू हो चुका है। भारत सरकार के अनुसार, समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को ओमान में मूल्य के आधार पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है। इससे भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धा बेहतर होने की उम्मीद है। CEPA के तहत कृषि और समुद्री उत्पाद, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, फुटवियर, ऑटोमोबाइल और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों में अवसरों पर विशेष जोर दिया गया है। कारोबारी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय कंपनियों के लिए ओमान को केवल अंतिम बिक्री बाजार के तौर पर देखने के बजाय manufacturing, processing, warehousing और distribution base के रूप में भी इस्तेमाल करने की संभावना है। FIEO के महानिदेशक Ajay Sahai ने बताया कि भारतीय कंपनियां कुछ intermediate products को ओमान भेजकर वहां processing कर सकती हैं और लागू trade तथा rules-of-origin शर्तों के तहत अन्य बाजारों तक पहुंच बनाने पर विचार कर सकती हैं। Sohar के आसपास warehousing स्थापित करने से GCC और East Africa के बाजारों में माल के वितरण को अधिक सुविधाजनक बनाने की संभावना भी बताई गई है। ओमान की रणनीतिक स्थिति का लाभ केवल Sohar तक सीमित नहीं है। भारत सरकार के अनुसार Sohar, Duqm और Salalah जैसे लॉजिस्टिक्स हब भारतीय निर्यातकों को Oman के साथ-साथ GCC और East African markets से जुड़ने में मदद कर सकते हैं। इन बंदरगाहों और उनसे जुड़े economic तथा free zones में भारतीय कंपनियां manufacturing, storage, logistics और distribution से संबंधित निवेश के विकल्प तलाश सकती हैं। भारत-ओमान कारोबारी सहयोग में कई सेक्टरों को संभावित अवसरों वाला माना जा रहा है। इनमें शामिल हैं: फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर टेक्सटाइल और गारमेंट्स फूड प्रोसेसिंग और FMCG इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स जेम्स एंड ज्वेलरी ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स ICT, AI और डेटा सेंटर रिन्यूएबल एनर्जी लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पोर्ट सेवाएं भारत के ओमान स्थित दूतावास के अनुसार, CEPA के बाद दोनों देशों के बीच कृषि, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी सहित कई क्षेत्रों में कारोबारी संवाद बढ़ाया जा रहा है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 11.18 अरब डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 10.61 अरब डॉलर से अधिक है। भारत के लिए ओमान Gulf क्षेत्र में महत्वपूर्ण कारोबारी साझेदारों में शामिल है। भारत और ओमान के बीच निवेश संबंध भी लंबे समय से सक्रिय हैं। भारतीय दूतावास के अनुसार, ओमान में 6,000 से अधिक India-Oman joint ventures के संचालन का अनुमान है। ओमान की भौगोलिक स्थिति उसे क्षेत्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। बंदरगाहों और फ्री जोन को एक साथ विकसित करने से कंपनियों को उत्पादन, भंडारण और निर्यात गतिविधियों को एक ही क्षेत्रीय नेटवर्क में व्यवस्थित करने का विकल्प मिल सकता है। हाल के रोडशो में भी इसी integrated port-and-free-zone ecosystem पर जोर दिया गया। उद्देश्य भारतीय कंपनियों को ओमान में निवेश करने के साथ-साथ वहां से दूसरे बाजारों में कारोबार विस्तार की संभावनाओं से परिचित कराना था। CEPA केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। भारत सरकार के अनुसार, समझौते में 127 services sub-sectors के लिए अवसर शामिल हैं। ICT क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों से संबंधित ceiling को भी 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है। इससे IT, engineering, consulting और अन्य knowledge-based businesses के लिए ओमान में संचालन स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। नई पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारतीय कंपनियां ओमान को सिर्फ एक निर्यात destination के रूप में नहीं, बल्कि regional manufacturing और distribution hub के रूप में भी देख सकती हैं। CEPA से मिलने वाली tariff benefits और ओमान के port तथा free-zone infrastructure का संयोजन कंपनियों को अपनी supply chains को नए तरीके से व्यवस्थित करने का विकल्प देता है। हालांकि किसी कंपनी के लिए निवेश का वास्तविक लाभ उसके उत्पाद, लागत, स्थानीय नियमों, origin requirements, logistics खर्च और लक्षित बाजार पर निर्भर करेगा। इसलिए हर कारोबारी अवसर का मूल्यांकन अलग-अलग किया जाना जरूरी होगा। नई दिल्ली का रोडशो और हालिया business forums यह संकेत देते हैं कि दोनों देश CEPA को केवल tariff agreement तक सीमित रखने के बजाय व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और services cooperation को बढ़ाने के माध्यम के रूप में आगे ले जाना चाहते हैं। सितंबर 2026 में Oman India Business Forum में भी CEPA के तहत नए बाजार, निवेश साझेदारी और Oman के logistics तथा economic zones के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। आने वाले समय में भारतीय कंपनियों की भागीदारी, नए निवेश प्रस्ताव और Sohar, Duqm तथा Salalah जैसे केंद्रों के इस्तेमाल से यह तय होगा कि ओमान भारत के लिए Middle East और East Africa की सप्लाई चेन में कितनी बड़ी भूमिका निभाता है।Sohar Port को प्रमुख कारोबारी गेटवे के रूप में पेश किया गया
CEPA से भारतीय निर्यातकों को बड़ा अवसर
ओमान को सिर्फ बाजार नहीं, क्षेत्रीय बेस बनाने की संभावना
Sohar के अलावा Duqm और Salalah भी महत्वपूर्ण
किन क्षेत्रों में बन सकते हैं अवसर?
दोनों देशों के बीच व्यापार कितना है?
भारतीय कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक्स का फायदा
प्रोफेशनल्स और सर्विस सेक्टर के लिए भी अवसर
कारोबारियों के लिए क्या बदल सकता है?
भारत-ओमान व्यापार संबंधों की अगली दिशा
भारत-ओमान व्यापार में नए अवसर, पोर्ट और फ्री जोन के जरिए ग्लोबल मार्केट तक पहुंच पर जोर






