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रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के पार, Fed के फैसले और महंगे तेल से बढ़ा दबाव


मुंबई: भारतीय रुपये पर दबाव गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को और बढ़ गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद डॉलर मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया। बुधवार को रुपया 95.9550 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि गुरुवार को यह करीब 96.01 रुपये प्रति डॉलर पर खुला।

डॉलर की मजबूती से रुपये पर दबाव

अमेरिकी फेड ने ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है। फेड के फैसले के बाद डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर पहुंच गया, जिससे एशियाई मुद्राओं पर दबाव देखने को मिला। बाजार में यह चिंता भी बनी हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आगे भी सख्त रुख अपना सकता है।

अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ सकता है, क्योंकि ऊंची अमेरिकी दरें डॉलर आधारित परिसंपत्तियों को अपेक्षाकृत आकर्षक बना सकती हैं। ऐसे माहौल में विदेशी पूंजी के प्रवाह और डॉलर की मांग पर निवेशकों की नजर रहती है।

कच्चा तेल भी बना महत्वपूर्ण कारण

रुपये के लिए दूसरी बड़ी चुनौती कच्चे तेल की कीमतें हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारतीय आयातकों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव बन सकता है।

17 सितंबर को Brent crude की कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही, हालांकि मध्य-पूर्व से आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं में कुछ कमी आने के बाद तेल की कीमतों में शुरुआती गिरावट भी दर्ज हुई।

RBI की भूमिका पर भी नजर

बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। हाल के कारोबारी सत्रों में RBI की डॉलर बिक्री ने रुपये को 96 रुपये के स्तर के ऊपर टिकाए रखने में मदद की थी। हालांकि तेल आयातकों की डॉलर मांग और वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती रुपये के लिए चुनौती बनी हुई है।

Reuters के अनुसार, NSE के IPO से जुड़े संभावित डॉलर प्रवाह और RBI के बाजार हस्तक्षेप से रुपये को कुछ समय के लिए सहारा मिल सकता है। लेकिन अगर रुपया लगातार 96 रुपये प्रति डॉलर से कमजोर रहता है, तो बाजार की धारणा पर इसका असर पड़ सकता है।

विदेशी निवेश और शेयर बाजार भी अहम

रुपये की चाल का संबंध विदेशी निवेश से भी है। भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी होने पर डॉलर की मांग बढ़ सकती है। इसके विपरीत विदेशी पूंजी का प्रवाह रुपये को समर्थन दे सकता है।

17 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार भी वैश्विक संकेतों पर नजर रख रहा था। फेड की दर बढ़ोतरी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत और NSE IPO जैसे घटनाक्रम निवेशकों के लिए प्रमुख बाजार संकेतक बने हुए हैं।

आगे किन संकेतकों पर रहेगी नजर?

आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करने में अमेरिकी फेड की अगली नीति, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश का प्रवाह और RBI की बाजार गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

फिलहाल रुपये का 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास पहुंचना भारतीय मुद्रा बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि किसी एक कारोबारी सत्र की चाल से लंबी अवधि की दिशा तय नहीं होती और बाजार की स्थिति वैश्विक आर्थिक तथा भू-राजनीतिक घटनाओं के साथ तेजी से बदल सकती है।