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लगातार सातवें सप्ताह कमजोर रहा शेयर बाजार, कच्चे तेल और विदेशी बिकवाली का दबाव


मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह भी राहत लेकर नहीं आया। प्रमुख सूचकांक Nifty 50 लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे बाजार की कमजोरी का दौर और लंबा हो गया। 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में Nifty 50 करीब 0.88 प्रतिशत गिरकर 23,140.50 पर बंद हुआ, जबकि Sensex में करीब 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 73,895.74 के स्तर पर रहा।

छह साल में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट

बाजार के लिए लगातार सात सप्ताह की गिरावट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के मुताबिक, Nifty की यह लगातार सातवीं साप्ताहिक गिरावट करीब छह वर्षों में सबसे लंबी गिरावट की श्रृंखला है। हालांकि शुक्रवार के कारोबार में घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बाजार को कुछ राहत मिली, लेकिन इससे पूरे सप्ताह का नुकसान खत्म नहीं हो सका।

गुरुवार को तेज बिकवाली

बीते सप्ताह बाजार में सबसे ज्यादा दबाव 24 सितंबर को देखने को मिला। उस दिन Nifty 50 करीब 1.64 प्रतिशत टूटकर 23,063.10 पर बंद हुआ। Sensex में भी करीब 1.67 प्रतिशत की गिरावट रही। इस दौरान कच्चे तेल की ऊंची कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

हालांकि अगले दिन यानी 25 सितंबर को बाजार में कुछ सुधार हुआ। Nifty 50 करीब 0.34 प्रतिशत चढ़ा, जबकि Sensex भी बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार में वैल्यू-बाइंग और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी को इस सुधार का एक कारण बताया गया।

महंगा कच्चा तेल बना बड़ी चिंता

भारतीय बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत इस समय महत्वपूर्ण कारक है। हालिया कारोबार में Brent crude 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा और एक समय यह 104 डॉलर से भी ऊपर पहुंचा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक महंगा क्रूड आयात बिल और महंगाई की चिंता बढ़ा सकता है।

महंगे तेल का असर कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है। खासकर ऐसे कारोबार जिनमें ईंधन और परिवहन लागत का हिस्सा अधिक है, उनके मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका बाजार में देखी जा रही है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका में 10-वर्षीय Treasury yield भी बाजार की निगाह में रही। पिछले सप्ताह यह 5 प्रतिशत के ऊपर चली गई और एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 5.11 प्रतिशत तक पहुंची। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी फिक्स्ड-इनकम परिसंपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं, जिससे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

भारतीय शेयर बाजार पर Foreign Portfolio Investors यानी FPI/FII की बिकवाली भी दबाव डाल रही है। 25 सितंबर तक सितंबर महीने में विदेशी निवेशकों की शुद्ध निकासी करीब ₹18,531 करोड़ बताई गई है। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इसी अवधि में लगभग ₹52,617 करोड़ की खरीदारी की, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।

इससे बाजार में एक तरफ विदेशी पूंजी की निकासी और दूसरी तरफ घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बीच संतुलन की स्थिति बनी हुई है।

भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण

बाजार की दिशा केवल आर्थिक आंकड़ों से तय नहीं हो रही। पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों से जुड़े घटनाक्रम भी कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। तेल आपूर्ति को लेकर किसी भी बड़ी चिंता का असर वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।

घरेलू बाजार में कुछ सहारा

लगातार विदेशी बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता बाजार के लिए एक सहारा बनी हुई है। 25 सितंबर को ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹2,838 करोड़ की खरीदारी की। इसके चलते शुक्रवार को प्रमुख सूचकांकों में कुछ रिकवरी देखने को मिली।

किन संकेतकों पर रहेगी नजर?

आने वाले कारोबारी सप्ताह में निवेशक मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी Treasury yields, विदेशी निवेशकों की गतिविधि, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं। इसके अलावा Federal Reserve के अधिकारियों की टिप्पणियां भी वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकती हैं।

निवेशकों के लिए क्या तस्वीर?

मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि लगातार गिरावट अपने आप में भविष्य की दिशा की गारंटी नहीं देती। कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन, घरेलू आर्थिक गतिविधियों और वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव भी बाजार की आगे की चाल को प्रभावित करेंगे।

निष्कर्ष

भारतीय शेयर बाजार ने 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में लगातार सातवीं साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। महंगा कच्चा तेल, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारकों में रहे। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक थामने का काम किया। अब बाजार की अगली दिशा काफी हद तक तेल की कीमतों, वैश्विक यील्ड और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर निर्भर रहेगी।