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बोकारो में कोयले की कमी से बिजली उत्पादन पर दबाव, चार थर्मल प्लांट प्रभावित


झारखंड के बोकारो जिले में लगातार हो रही बारिश का असर अब कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर दिखाई देने लगा है। बारिश के कारण कोयले की खदानों से उत्पादन और उसकी ढुलाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर बोकारो के चार प्रमुख थर्मल पावर प्लांटों तक पहुंचने वाली कोयले की आपूर्ति पर पड़ा है।

जानकारी के मुताबिक बोकारो पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड यानी BPSCL, तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन यानी TTPS, डीवीसी के बोकारो थर्मल पावर स्टेशन और चंद्रपुरा थर्मल पावर स्टेशन में कोयले का स्टॉक सामान्य स्थिति की तुलना में कम हो गया है। इन संयंत्रों को मुख्य रूप से सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी CCL से कोयला मिलता है, जबकि BPSCL को कुछ आपूर्ति BCCL से भी होती है। 

तेनुघाट प्लांट पर सबसे ज्यादा दबाव

तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन की स्थिति इस समय खास तौर पर चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार प्लांट के पास लगभग 30 हजार टन कोयला बचा है, जो करीब चार से पांच दिनों के लिए पर्याप्त बताया जा रहा है।

प्लांट की दो चालू इकाइयों की संयुक्त क्षमता लगभग 420 मेगावाट बताई गई है, लेकिन कोयले की कमी के चलते उत्पादन इससे काफी नीचे आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक प्लांट को प्रतिदिन करीब 3,200 टन क्षमता वाली एक रेलवे रैक मिल रही है, जबकि दोनों इकाइयों को पूरी क्षमता पर चलाने के लिए करीब 7,000 टन यानी लगभग दो रैक प्रतिदिन की जरूरत है। 

BPSCL में भी घटा उत्पादन

बोकारो पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड में भी कोयले की कमी का असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार यहां उत्पादन पहले लगभग 200 मेगावाट के आसपास था, जो घटकर करीब 170 मेगावाट रह गया है।

प्लांट में करीब 20 हजार टन कोयले का स्टॉक बताया गया है, जो लगभग पांच से छह दिनों के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। 

BTPS और चंद्रपुरा प्लांट भी प्रभावित

डीवीसी के बोकारो थर्मल पावर स्टेशन में लगभग 40 हजार टन कोयला उपलब्ध होने की बात सामने आई है। यह स्टॉक करीब सात दिनों तक चलने का अनुमान है। वहीं प्लांट को पहले जहां प्रतिदिन तीन कोयला रैक मिल रही थीं, वहां आपूर्ति घटकर लगभग दो रैक रह गई है।

चंद्रपुरा थर्मल पावर स्टेशन भी कम कोयला आपूर्ति से प्रभावित बताया गया है। लगातार बारिश और कोयला परिवहन में आई दिक्कतों के कारण इन दोनों संयंत्रों के संचालन पर भी दबाव बढ़ा है। 

आखिर क्यों पैदा हुई यह स्थिति?

दरअसल, झारखंड के प्रमुख कोयला उत्पादक इलाकों में लगातार बारिश ने खनन और परिवहन दोनों को प्रभावित किया है। बारिश के दौरान खदानों में पानी भरने, आंतरिक सड़कों पर आवाजाही प्रभावित होने और रेलवे परिवहन में बाधा जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसका असर कोयले की नियमित आपूर्ति पर पड़ता है।

हालिया राष्ट्रीय आंकड़ों में भी थर्मल पावर सेक्टर के कोयला स्टॉक पर दबाव दिखाई दिया है। 19 सितंबर तक देश के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का कुल स्टॉक करीब 22.9 मिलियन टन बताया गया, जो निर्धारित मानक स्टॉक का लगभग 39 प्रतिशत था। 

बिजली आपूर्ति पर क्या हो सकता है असर?

कोयले की आपूर्ति में कमी का सीधा संबंध थर्मल पावर प्लांटों की उत्पादन क्षमता से है। अगर किसी संयंत्र को जरूरत के मुताबिक ईंधन नहीं मिलता है, तो उसे उत्पादन कम करना पड़ सकता है।

बोकारो में मौजूदा स्थिति को देखते हुए बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि जिले या पूरे राज्य में निश्चित रूप से बड़ा बिजली संकट पैदा हो गया है। वास्तविक स्थिति आने वाले दिनों में कोयला आपूर्ति और बारिश की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

आपूर्ति सुधारने की कोशिश

कोयले की उपलब्धता को लेकर देशभर में आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। कोयला मंत्रालय की ओर से सितंबर की शुरुआत में बताया गया था कि बारिश कम होने के साथ Coal India की उत्पादन और पावर सेक्टर को डिस्पैच में सुधार हुआ है। 1 से 3 सितंबर के करीब 1.36 मिलियन टन दैनिक औसत उत्पादन के मुकाबले 6 सितंबर को उत्पादन लगभग 1.83 मिलियन टन तक पहुंचने की जानकारी दी गई थी। 

फिलहाल बोकारो के चारों थर्मल प्लांटों के लिए सबसे अहम मुद्दा नियमित कोयला आपूर्ति बनाए रखना है। अगर बारिश में कमी आती है और खदानों से उत्पादन तथा रेलवे के जरिए परिवहन सामान्य होता है, तो स्टॉक की स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

यानी बोकारो में फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बिजलीघर बंद होना नहीं, बल्कि सीमित कोयला स्टॉक के बीच उत्पादन को लगातार बनाए रखना है। आने वाले कुछ दिन इस स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।