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देवघर एम्स की बड़ी उपलब्धि: बेहद कम हृदय क्षमता वाले मरीज का सफल ऑफ-पंप बाईपास, पहली बार किया गया LIMA ग्राफ्ट का उपयोग


रांची एक्सप्रेस ब्यूरो 

देवघर : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), देवघर ने कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. नितिन गंगाने के नेतृत्व में हृदय शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार गंभीर कोरोनरी धमनी रोग और अत्यंत कम पंपिंग क्षमता वाले मरीज का सफल ऑफ-पंप कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट (OPCABG) किया गया।

मरीज की हृदय की पंपिंग क्षमता LVEF 25–30% थी। इतनी कम क्षमता वाले मरीजों में बिना मशीन के बाईपास सर्जरी करना अत्यंत जटिल और जोखिम भरा माना जाता है।

यह जटिल ऑपरेशन कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एनेस्थीसिया विभाग के सहयोग से किया। सर्जरी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि छाती के भीतर स्थित लेफ्ट इंटरनल मैमरी आर्टरी (LIMA) का बाईपास के लिए सफलतापूर्वक उपयोग किया गया। हृदय बाईपास में LIMA को दीर्घकालीन बेहतर परिणामों के लिए सर्वोत्तम ग्राफ्ट माना जाता है।

यह सर्जरी डॉ. रजत अग्रवाल, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग और डॉ. संजय कुमार, विभागाध्यक्ष एनेस्थीसिया विभाग के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम के सहयोग से सम्पन्न हुई।

ऑपरेशन के बाद मरीज का स्वास्थ्य तेजी से सुधरा और उसे पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

प्रो. नितिन गंगाने ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता एम्स देवघर में उन्नत हृदय शल्य चिकित्सा सेवाओं के निरंतर विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब क्षेत्र के मरीजों को जटिल हृदय रोगों के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।