देवघर के सारठ में बारिश बनी गरीबों के लिए आफत; 02 का आशियाना ध्वस्त
देवघर के सारठ में बारिश बनी गरीबों के लिए आफत; 02 का आशियाना ध्वस्त
• खुले आसमान के नीचे रहने को विवश परिवार
• डीसी व मुख्यमंत्री से मदद की लगाई गुहार
शिवकुमार यादव,
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
सारठ (देवघर) : एक तरफ झमाझम बारिश से खेत लहलहा रहे हैं और किसानों के चेहरे पर मुस्कान है, तो दूसरी तरफ यही बारिश गरीबों के लिए काल बनकर टूट रही है।
सारठ प्रखंड में लगातार हो रही बारिश ने 02 गरीब परिवारों का आशियाना छीन लिया है और उन्हें खुले आसमान के नीचे आने को विवश कर दिया है।
पहली घटना डिंडाकोली पंचायत के ओझाडीह-गंडा गांव की है। यहां के मजदूर अघनु पंडित का कच्चा मकान मंगलवार को अचानक भरभराकर गिर गया।
गनीमत रही कि हादसे के वक्त घर में महिला और बच्चे मौजूद नहीं थे, वरना एक बड़ी अनहोनी हो सकती थी। अघनु की आंखों में बेबसी साफ झलक रही है। दैनिक मजदूरी से किसी तरह परिवार का पेट पालने वाले अघनु ने बताया कि उनका पूरा परिवार इसी एक कमरे में रहता था। अब एक दीवार गिर जाने से पूरा घर असुरक्षित हो गया है।
रुआंसे स्वर में अघनु ने कहा, "साहब, बहुत गरीब आदमी हैं। दिन भर मजदूरी करते हैं तब शाम को चूल्हा जलता है। आज तक सरकारी आवास नहीं मिला। कहां जाएंगे बच्चों को लेकर।"
दूसरी तस्वीर और भी दर्दनाक है। शिमला पंचायत के बेहंगा गांव में सुखदेव दास का मिट्टी और खपरैल का घर पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। लगातार बारिश से मिट्टी की दीवार गल गई और घर बैठ गया। सुखदेव ने अपने आशियाने को बचाने के लिए छत पर प्लास्टिक डाल रखा था, लेकिन गरीबी की यह ढाल भी बारिश के कहर को रोक नहीं पाई। अब आधा घर गिर चुका है और बचे हुए हिस्से में प्लास्टिक तानकर वह किसी तरह परिवार के साथ रह रहा है।
सुखदेव ने बताया कि सरकारी आवास के लिए उसने कई बार पंचायत में आवेदन दिया, 'सरकार आपके द्वार' कार्यक्रम में भी फॉर्म भरा, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। उसका आरोप है कि पंचायत में पैसे वालों को आवास का लाभ दे दिया जाता है, जबकि हम जैसे गरीबों को कागजों में ही उलझा दिया जाता है।
दोनों परिवारों की पीड़ा एक ही है - गरीबी, बेबसी और सिस्टम की अनदेखी। बारिश ने सिर्फ उनकी दीवारें नहीं गिराई, उनके सपनों दास को भी तोड़ दिया है। अब ये परिवार टकटकी लगाए प्रशासन की ओर देख रहे हैं कि कब कोई उनकी सुध लेगा और उन्हें सिर छुपाने के लिए एक पक्की छत नसीब होगी।
गरीबी और भ्रष्ट सिस्टम की मार से त्रस्त अघनु पंडित और सुखदेव दास ने अपनी बेबशी पर आंसू पोंछते हुए सूबे के जिले के *उपायुक्त व मुख्यमंत्री "हेमंत सोरेन"* से अपने छोटे-छोटे बच्चों और परिवार की खातिर एक अदद सरकारी आवास दिए जाने की गुहार लगाई है।






