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गावां प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया गया दिशोम कराम पर्व


रांची एक्सप्रेस संवाददाता 
   
गावां।झारखंड की आदिवासी संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी लोक आस्था का प्रमुख पर्व दिशोम कराम मंगलवार को गावां प्रखंड के विभिन्न आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाज, उल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। पर्व में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष एवं ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और प्रकृति के प्रति आस्था की अनूठी झलक देखने को मिली।

  तारापुर में करमा पर्व मिलन समारोह

 जमडार पंचायत के ग्राम तारापुर में दिशोम कराम पर्व के अवसर पर विधिवत कराम डाली की पूजा-अर्चना के बाद कराम मिलन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। पूरे क्षेत्र में पर्व को लेकर उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा।

 मांदर की थाप पर गूंजे पारंपरिक गीत

 समारोह के दौरान मांदर की थाप और पारंपरिक लोकगीतों की धुन पर महिलाओं ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। पारंपरिक परिधान में महिलाओं की मनमोहक प्रस्तुति ने पूरे समारोह को सांस्कृतिक रंग से सराबोर कर दिया।

 गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से लोगों ने पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। इस दौरान ग्रामीणों ने एक-दूसरे को कराम पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

  प्रकृति, कृषि और भाईचारे का पर्व

 समारोह में उपस्थित बुद्धिजीवियों ने कहा कि कराम पर्व आदिवासी समाज के लिए केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि, भाईचारे, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।

 करम वृक्ष और प्रकृति के प्रति सम्मान एवं आस्था इस पर्व की प्रमुख विशेषता है। कराम पर्व के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति कृतज्ञता का संदेश समाज की नई पीढ़ी तक पहुंचता है।

 आदिवासी संस्कृति के संरक्षण पर जोर

 समारोह के दौरान आदिवासी समाज की लोककथाओं, परंपराओं, सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी चर्चा हुई। पंचायत क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे लोगों ने पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के साथ पर्व मनाया।

 इस अवसर पर लोगों ने आपसी भाईचारा, सामाजिक एकजुटता और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की जीवंत छटा देखने को मिली।