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बेटे के गम में पिता ने तोड़ा दम, अब जेल में बंद इकलौते बेटे के हाथों मुखाग्नि की आस


रांची एक्सप्रेस संवाददाता 

पिता की अंतिम इच्छा पूरी कराने के लिए पत्नी-बेटियों ने प्रशासन से लगाई गुहार, पुलिस अभिरक्षा में पेरोल देने की मांग
तिसरी/गिरिडीह जिले के तिसरी थाना क्षेत्र में इकलौते बेटे के वियोग का दर्द और मुफलिसी ने एक पिता की जिंदगी छीन ली। तिसरी प्रखंड के सलगाडीह गांव में मंगलवार को सवना मुर्मू (पिता स्व. जटा मुर्मू) की मौत के बाद पूरा गांव गम में डूब गया। सबसे मार्मिक बात यह है कि मृतक की अंतिम इच्छा थी कि उनके इकलौते बेटे के हाथों ही उन्हें मुखाग्नि मिले। लेकिन उनका बेटा सोमाय मुर्मू उर्फ अमरदीप वर्ष 2019 से दुष्कर्म के एक मामले में जेल में सजा काट रहा है।
पिता की मौत की खबर मिलने के बाद परिजनों के सामने अब सबसे बड़ी चिंता अंतिम इच्छा पूरी कराने की है। इसी उम्मीद में परिजनों और ग्रामीणों ने फिलहाल अंतिम संस्कार रोक रखा है। मृतक की पत्नी बड़की सोरेन और पांचों बेटियां सोमारी मुर्मू, सावित्री मुर्मू, हीरामणि मुर्मू, बसंती मुर्मू और काजल मुर्मू का रो-रोकर बुरा हाल है।

कम से कम पिता को मुखाग्नि देने तो आने दें
मृतक की बेटी हीरामणि मुर्मू ने जिला प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनके भाई को कुछ समय के लिए पेरोल पर रिहा किया जाए, ताकि वह अपने पिता को अंतिम विदाई देते हुए मुखाग्नि दे सके। परिजनों का कहना है कि यह मांग किसी अन्य सुविधा के लिए नहीं, बल्कि पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए की जा रही है।
परिजनों और ग्रामीणों ने मानवीय आधार पर सोमाय मुर्मू को पुलिस अभिरक्षा में कस्टडी पेरोल देकर अंतिम संस्कार में शामिल कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पिता-पुत्र के इस अंतिम मिलन का अवसर परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

मुखिया ने प्रशासन को भेजा आवेदन
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तिसरी पंचायत के मुखिया किशोरी साव ने परिजनों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन को गिरिडीह जिला प्रशासन के पास भेजा है। आवेदन के माध्यम से प्रशासन से पूरे मामले पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जेल में बंद बेटे को पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने का आग्रह किया गया है।
अब परिवार की निगाहें जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं। एक ओर पिता का शव अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पत्नी और पांचों बेटियां इस उम्मीद में हैं कि शायद प्रशासन की अनुमति से बेटा जेल से बाहर आकर अपने पिता को अंतिम विदाई दे सके।