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गुमला में बॉक्साइट खदान हादसा, घायल मजदूर ने 13 दिन बाद इलाज के दौरान तोड़ा दम


गुमला। झारखंड के गुमला जिले से बॉक्साइट खनन क्षेत्र में हुए हादसे की दुखद खबर सामने आई है। खदान में काम करने के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए एक मजदूर की करीब 13 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान 46 वर्षीय चैतु उरांव के रूप में हुई है, जो घाघरा थाना क्षेत्र के सेरेंगदाग का रहने वाला बताया गया है।

खदान में काम करते समय हुआ हादसा

रिपोर्ट के अनुसार चैतु उरांव गुमला के घाघरा क्षेत्र में स्थित बॉक्साइट माइंस में मजदूरी करते थे। सितंबर की शुरुआत में खदान में काम करने के दौरान वह अचानक गिर पड़े। गिरने से उनके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं।

हादसे के बाद वहां मौजूद लोगों और साथी मजदूरों की मदद से उन्हें इलाज के लिए घाघरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्रारंभिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए गुमला सदर अस्पताल रेफर कर दिया।

इलाज के बाद घर लौटे थे

गुमला सदर अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ था। इसके बाद वह घर लौट गए थे। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उनकी हालत पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

लेकिन करीब दो सप्ताह के भीतर उनकी तबीयत दोबारा बिगड़ गई। रिपोर्ट के मुताबिक 22 सितंबर को उनकी हालत अचानक गंभीर हो गई, जिसके बाद परिजन उन्हें फिर से गुमला सदर अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल में इलाज के दौरान मौत

अस्पताल में चिकित्सकों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी रही। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मौत की सूचना मिलते ही परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे। घटना की जानकारी पुलिस को भी दी गई, जिसके बाद पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम

पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

इस घटना के बाद मृतक के परिवार में मातम का माहौल है। परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी बेहद दुखद रहा क्योंकि दुर्घटना के बाद करीब दो सप्ताह तक घायल मजदूर के इलाज और स्वस्थ होने की उम्मीद बनी हुई थी।

खनन क्षेत्र में सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

बॉक्साइट खनन गुमला जिले के कई इलाकों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन खनन क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी अहम मुद्दा है।

इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि खदानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा मानकों, निगरानी और दुर्घटना की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में हादसे के पीछे किसी विशेष सुरक्षा चूक या लापरवाही की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विभाग या पुलिस की आधिकारिक जांच का इंतजार जरूरी है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

चैतु उरांव की मौत की खबर मिलने के बाद उनके परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। परिवार ने एक ऐसे सदस्य को खो दिया, जो मजदूरी करके अपने घर-परिवार का सहारा बना हुआ था।

फिलहाल पुलिस की ओर से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया है।

निष्कर्ष

गुमला के घाघरा क्षेत्र में बॉक्साइट माइंस में काम करने के दौरान घायल हुए 46 वर्षीय चैतु उरांव की करीब 13 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे में उनके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई थीं। प्रारंभिक उपचार के बाद हालत में सुधार हुआ था, लेकिन बाद में तबीयत बिगड़ने पर दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी जान चली गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।

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