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हजारीबाग में फर्जी Tata Power EV चार्जिंग स्टेशन फ्रेंचाइजी के नाम पर साइबर ठगी, 5 गिरफ्तार


हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग में पुलिस ने Tata Power EV चार्जिंग स्टेशन की फर्जी फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर कथित साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य लोगों को EV चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी देने का झांसा देकर उनसे सुरक्षा राशि और अन्य शुल्क के नाम पर पैसे वसूलते थे।

किराए के मकान से चल रहा था कथित नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, 15 सितंबर को एसपी अमन कुमार को बाबा पथ-हुरहुरु इलाके में एक किराए के मकान में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। सूचना की जांच के बाद पुलिस ने विशेष टीम गठित की और बताए गए ठिकाने पर छापेमारी की।

पुलिस टीम ने मकान की घेराबंदी की तो वहां मौजूद पांच लोगों ने कथित तौर पर भागने की कोशिश की। पुलिस ने सभी को पकड़ लिया और परिसर की तलाशी ली।

पांच आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • अमरजीत कुमार, 21 वर्ष
  • संजीव कुमार, 19 वर्ष
  • संटू कुमार, 34 वर्ष
  • प्रवीण कुमार, 51 वर्ष
  • राजू कुमार, 21 वर्ष

पुलिस के अनुसार, पांचों आरोपी बिहार के नवादा और नालंदा जिले के रहने वाले बताए गए हैं।

11 मोबाइल और लैपटॉप समेत कई सामान जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, कथित फर्जी Tata Power EV चार्जिंग स्टेशन के पहचान पत्र और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए। पुलिस अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि मोबाइल और लैपटॉप से कथित ठगी में इस्तेमाल किए गए नंबरों, संपर्कों, दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

ऐसे दिया जाता था कथित ठगी का झांसा

पुलिस के अनुसार, आरोपी लोगों के सामने EV चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी का कारोबार पेश करते थे। फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र दिखाकर इस प्रस्ताव को वास्तविक साबित करने की कोशिश की जाती थी।

इसके बाद इच्छुक लोगों से फ्रेंचाइजी शुरू करने या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर रकम लेने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कितने लोगों से संपर्क किया गया और कुल कितनी रकम कथित तौर पर वसूली गई।

पुलिस खंगाल रही है डिजिटल सबूत

जब्त मोबाइल फोन और लैपटॉप इस जांच का अहम हिस्सा हैं। पुलिस इनके जरिए कथित नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों, संभावित पीड़ितों और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।

जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि क्या यह गिरोह केवल हजारीबाग में सक्रिय था या दूसरे राज्यों में भी इसी तरीके से लोगों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों ने संभावित अन्य पीड़ितों और सहयोगियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

थाने में मामला दर्ज

पुलिस ने इस मामले में सदर (बड़ा बाजार) थाना में कांड संख्या 226/26 दर्ज किए जाने की जानकारी दी है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

इस कार्रवाई में सदर एसडीपीओ रूपक कुमार सिंह, बड़ा बाजार ओपी प्रभारी मुकेश कुमार रजक, पुलिस अधिकारियों तथा तकनीकी शाखा की टीम की भूमिका बताई गई है।

आगे क्या होगी जांच?

पुलिस अब मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जांच कर रही है:

  1. कितने लोगों को कथित तौर पर फ्रेंचाइजी का प्रस्ताव दिया गया।
  2. पीड़ितों से कितनी रकम ली गई।
  3. पैसों का लेन-देन किन खातों या माध्यमों से हुआ।
  4. फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज कहां तैयार किए गए।
  5. गिरोह में गिरफ्तार पांच आरोपियों के अलावा और कौन लोग शामिल हैं।
  6. क्या इसी तरीके से दूसरे जिलों या राज्यों में भी ठगी की गई।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी।

लोगों के लिए जरूरी सावधानी

EV चार्जिंग स्टेशन, डीलरशिप या किसी भी कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत संपर्क माध्यम से प्रस्ताव की पुष्टि करना, बिना सत्यापन के सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं देना और संदिग्ध दस्तावेजों पर भरोसा न करना महत्वपूर्ण है।