करम पर्व ने दिया प्रकृति संरक्षण और भाई-बहन के प्रेम का संदेश...
प्रकृति बचेगी तभी जीवन और आने वाला भविष्य सुरक्षित रहेगा : अविनाश देव
*मेदिनीनगर।* संत मरियम आवासीय विद्यालय के प्रांगण में बुधवार को करम पर्व पारंपरिक उल्लास और झारखंडी संस्कृति के रंग में मनाया गया। छात्राओं ने करम गीतों पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में भाई-बहन के प्रेम के साथ जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश प्रमुखता से उभरा।
विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव ने कहा कि करम केवल पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के गहरे रिश्ते को समझने का अवसर है। यह पर्व हमें पेड़-पौधों की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, भाई-बहन के रिश्तों को मजबूत करने तथा समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के नाम पर जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है। जंगल और पेड़ नहीं बचेंगे तो पानी, खेती और मानव जीवन भी प्रभावित होगा।
जीव विज्ञान शिक्षक प्रवीण दुबे ने करम पर्व के इतिहास, संस्कृति और वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसे प्रकृति एवं पर्यावरण से जुड़े पर्व के रूप में समझने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि पेड़ जलचक्र, मिट्टी, वर्षा और जैव-विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में छात्राओं शिवानी सिंह, साक्षी कुमारी, संजना कुमारी, साक्षी तिवारी, चांदनी कुमारी, चंचल कुमारी, अंजलि कुमारी, रिया कुमारी और अर्चना कुमारी ने करम गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं कक्षा 12वीं के अनमोल, आयुष, नवनीत, कुणाल और वैभव ने भाई की भूमिका निभाते हुए बहनों के साथ पर्व की परंपरा निभाई।
वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की संस्कृति और इतिहास में प्रकृति संरक्षण का विशेष महत्व रहा है। करम पर्व इसी प्रकृति-केंद्रित जीवनदृष्टि और सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाने का संदेश देता है।






