श्रद्धा-भक्ति से गूंजा कबीर ज्ञान मंदिर, धूमधाम से मना सद्गुरु माँ ज्ञान का दिव्य जन्मोत्सव
दोपहर में विशेष यज्ञ-हवन, शाम को आध्यात्मिक प्रवचन और रात में एआई नाट्य-मंचन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
गिरिडीह: भाद्र शुक्ल चतुर्थी के पावन अवसर पर सोमवार को श्री कबीर ज्ञान मंदिर, गिरिडीह में परम वंदनीया सद्गुरु माँ ज्ञान का दिव्य जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। जन्मोत्सव को लेकर सुबह से ही आश्रम परिसर में भक्तों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में डूबा रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः आठ बजे गुरुपूजन, भजन कीर्तन एवं बधाई अर्पण के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने सद्गुरु माँ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए मंगलकामना की। इसके बाद दोपहर 12 बजे दीक्षा एवं मुंडन संस्कार का आयोजन किया गया।
यज्ञ-हवन में विश्व शांति और लोकमंगल की कामना
दोपहर दो बजे आश्रम परिसर में विशेष यज्ञ-हवन एवं कथा का आयोजन हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और गुरुभक्ति के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर विश्व शांति, लोकमंगल, सामाजिक सद्भाव एवं जनकल्याण की कामना की। यज्ञ-हवन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा देखने को मिली।
तत्क्षण भाव-अभिव्यक्ति प्रतियोगिता ने मोहा मन अपराह्न चार बजे सद्गुरु माँ ज्ञान के भजनों पर आधारित तत्क्षण भाव-अभिव्यक्ति प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों ने भक्ति और भावनाओं से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। अमृतमय वचनों से मिली जीवन को दिशा संध्या छह बजे आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन हुआ। इस दौरान सद्गुरु माँ के अमृतमय वचनों और आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से जीवन में सदाचार, आत्मचिंतन, सेवा और लोककल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला गया। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से प्रवचन का श्रवण किया। एआई नाट्य-मंचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां रात्रि आठ बजे सद्गुरु माँ ज्ञान के जीवन एवं आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित विशेष एआई नाट्य-मंचन प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही ‘मनुस्मृति में नारी’ नाटक एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक संदेश के साथ कला और तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिला। रात्रि दस बजे डांडिया नृत्य एवं महाआरती का आयोजन किया गया। भक्तों ने उत्साहपूर्वक डांडिया में भाग लिया और इसके बाद महाआरती में शामिल होकर सद्गुरु माँ के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित की। मंगलमय वातावरण में कार्यक्रम का समापन हुआ। अध्यात्म और साहित्य साधना का अनूठा संगम उल्लेखनीय है कि सद्गुरु माँ ज्ञान का जन्म वर्ष 1960 में गिरिडीह में हुआ। मात्र 15 वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास का संकल्प लेकर अध्यात्म और लोककल्याण का मार्ग चुना। वर्ष 1985 में उन्होंने गिरिडीह में श्री कबीर ज्ञान मंदिर आश्रम की स्थापना की। अध्यात्म के साथ साहित्य साधना के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान बताया जाता है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता पर आठ खंडों और लगभग 4500 पृष्ठों में ‘गीता ज्ञान दर्पण’ भाष्य तथा कबीर साहेब की ‘बीजक’ टीका का लेखन किया है। सद्गुरु माँ ज्ञान के जन्मोत्सव के अवसर पर दिनभर चले धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और लोकमंगल की भावना से जोड़ा। पूरे आयोजन के दौरान आश्रम परिसर सद्गुरु माँ की भक्ति और जयघोष से गुंजायमान रहा।






