दसलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की हुई आराधना, मुनिसंघ के मंगल प्रवचन से भक्तिमय हुआ माहौल
अहंकार छोड़ विनम्रता अपनाना ही 'उत्तम मार्दव धर्म' का संदेश
अनिल विश्वकर्मा
रामगढ़। दसलक्षण महापर्व के दूसरे दिन गुरुवार को रामगढ़ का जैन समाज भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास में डूबा रहा। श्री दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम मार्दव धर्म की आराधना को लेकर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जिनालय में दर्शन, अभिषेक और शांतिधारा के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। मुनिसंघ के मंगल प्रवचन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
'उत्तम मार्दव धर्म' सहज विनम्रता और मान-अहंकार का त्याग है
मुनिसंघ के सान्निध्य में आयोजित प्रवचन में महाराज श्री ने कहा कि उत्तम मार्दव धर्म का सार सहज विनम्रता और मान-अहंकार का त्याग है। धन, पद, प्रतिष्ठा अथवा ज्ञान का अभिमान मनुष्य को उसके वास्तविक आत्मस्वरूप से दूर कर देता है। अहंकार जहां आत्मा को बंधनों में जकड़ता है, वहीं विनम्रता मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करती है।
विनम्रता को जीवन का हिस्सा बनाना ही मार्दव धर्म की वास्तविक साधना है
उन्होंने कहा कि धर्म केवल मंदिर में पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव व्यक्ति के दैनिक व्यवहार और आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। विनम्रता को जीवन का हिस्सा बनाना ही मार्दव धर्म की वास्तविक साधना है। प्रवचन के दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
इन परिवारों ने मिला जलाभिषेक-शांतिधारा का पुण्यार्जन
मंदिर में विधि-विधान के साथ विभिन्न वेदियों और भगवान की प्रतिमाओं का जलाभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। नेमिनाथ भगवान की पाण्डुशिला स्थित अष्टधातु प्रतिमा के कलश जलाभिषेक का पुण्यार्जन विद्या प्रकाश एवं पदम चंद छाबड़ा परिवार ने प्राप्त किया। वही, पाण्डुशिला शांतिधारा का पुण्य हरक चंद, नम्रता, विवेक, विकास, सम्यक एवं शाश्वत अजमेरा परिवार को मिला। जबकि, तीनों वेदियों की बड़ी प्रतिमाओं के कलश जलाभिषेक का पुण्यार्जन रमेश, विकास एवं अमित सेठी परिवार, अरुणा जैन एवं डॉ शरद जैन परिवार तथा अशोक, प्रेम, अमित एवं आरव काला परिवार ने प्राप्त किया। प्राचीन चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा का कलश जलाभिषेक इंद्रमणि देवी चूड़ीवाल परिवार ने किया। वहीं महावीर भगवान की प्राचीन प्रतिमा का कलश जलाभिषेक शौर्य पांड्या के जन्मदिन के अवसर पर समस्त पांड्या परिवार ने किया। पारसनाथ भगवान की बड़ी प्रतिमा की शांतिधारा का पुण्यार्जन महिपाल, अशोक, सुनील एवं संजय सेठी परिवार ने प्राप्त किया।
रांची रोड जिनालय में भी दिनभर चला धार्मिक अनुष्ठान
रांची रोड स्थित 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में भी दसलक्षण महापर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। यहां प्रथम जलाभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्यार्जन राजीव जैन (रांची रोड) ने प्राप्त किया। दोनों जिनालयों में दिनभर पूजा-अर्चना, भक्ति संगीत, अभिषेक, शांतिधारा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा। कार्यक्रम की जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन ने दिया।






