डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देकर देश को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया, अब शुल्क लगाने से पहले सरकार करे पुनर्विचार
यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर वापस ले केंद्र सरकार : अमित साहू
अनिल विश्वकर्मा
रामगढ़। फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अमित साहू ने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र सरकार से यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप यूपीआई देश के डिजिटल भुगतान तंत्र का प्रमुख माध्यम बन गया है।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल, किफायती और प्रोत्साहन आधारित बनाए
अमित साहू ने कहा कि डिजिटल भुगतान को लेकर कारोबारियों और आम लोगों में विश्वास बढ़ाने के बाद अब शुल्क संबंधी व्यवस्था लाने से पहले केंद्र सरकार को इसके प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल, किफायती और प्रोत्साहन आधारित बनाए रखे।
कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सरकार
उन्होंने कहा कि यदि शुल्क व्यवस्था लागू होती है तो इसका असर व्यापारियों की लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारी समुदाय यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर अतिरिक्त लागत को लेकर चिंतित है और इस मुद्दे पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार ने 15 सितंबर को स्पष्ट किया है कि एमडीआर ग्राहकों पर लगाया जाने वाला टैक्स या शुल्क नहीं है। सरकार के अनुसार व्यक्ति-से-व्यक्ति सभी यूपीआई लेनदेन नि:शुल्क रहेंगे और ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी नि:शुल्क होंगे। सरकार ने कहा है कि निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर ही एमडीआर लागू होगा तथा करीब 96 प्रतिशत व्यक्ति से व्यापारी लेनदेन इससे अप्रभावित रहेंगे।
स्पष्ट और ठोस कदम उठाने की मांग
अमित साहू ने कहा कि सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच व्यापक विमर्श के बाद ही इस व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र से व्यापारियों की आशंकाओं को दूर करने के लिए स्पष्ट और ठोस कदम उठाने की मांग की।






