अरका जैन विश्वविद्यालय व दूरदर्शन केंद्र रांची के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस का आगाज, राजभाषा हिंदी की उपयोगिता पर विमर्श
अरका जैन विश्वविद्यालय एवं दूरदर्शन केंद्र, रांची के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस का शानदार आगाज — राजभाषा हिंदी की उपयोगिता एवं प्रासंगिकता पर हुआ विशेष विमर्श
मानसिक दासता से बंधन में बंधा पंछी कब उन्मुक्त गगन में पंख खोलेगा, सारी दुनिया के लोग पूछते हैं—आखिर भारत किस दिन अपनी भाषा में बोलेगा
रांची, 8 सितंबर 2026।
अरका जैन विश्वविद्यालय एवं दूरदर्शन केंद्र, रांची के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 14 सितंबर हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में मंगलवार को अरका जैन विश्वविद्यालय के रांची सिटी ऑफिस, लालपुर में विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय *राजभाषा हिंदी की उपयोगिता और महत्व आज के संदर्भ में* रहा।
कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक एवं तकनीकी संस्थानों से जुड़े शिक्षकों, साहित्यकारों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता करते हुए हिंदी की वर्तमान प्रासंगिकता, चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार रखे। आचार्यकुल झारखंड, रांची विश्वविद्यालय, भारती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, संत जेवियर कॉलेज, आईसीएफएआई विश्वविद्यालय, अरका जैन विश्वविद्यालय, विवेकानंद विद्या मंदिर, साहित्यिक मंच, राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय तथा तकनीकी क्षेत्र के शोधार्थियों की सहभागिता विशेष रूप से रही।
संगोष्ठी में धर्मेंद्र कुमार साहू कीर्ति तिवारी, डॉ. ओम प्रकाश, ज्ञानेश साहू, दीनबंधु सिंह, डॉ. अमित चतुर्वेदी, डॉ. प्रभात भास्कर, शुभम चौधरी, सुनीता अग्रवाल, श्रीमती संध्या चौधरी उर्वशी, डॉ. वासुदेव प्रसाद, डॉ. कमल बोस, डॉ. उपेंद्र उपाध्याय, करुणा, हरीश कुमार एवं डॉ. शिवहरण सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आत्मगौरव और ज्ञान परंपरा की सशक्त अभिव्यक्ति है। आज आवश्यकता है कि हिंदी को शिक्षा, प्रशासन, तकनीक, शोध और जनसंचार के क्षेत्रों में और अधिक प्रभावी बनाया जाए।
कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए। वहीं कवयित्रियों की सशक्त काव्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा वातावरण हिंदी प्रेम एवं साहित्यिक चेतना से सराबोर हो गया।
यह आयोजन 14 सितंबर 2026 हिंदी दिवस के विशेष कार्यक्रम की दिशा में एक प्रभावशाली एवं सार्थक शुरुआत के रूप में सामने आया।






