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सात दिनों से चूरी परियोजना में फंसी कंटीन्यूअस माइनर, उत्पादन ठप


चाल धंसने के बाद मलबे में दबी मशीन को निकालने का काम जारी, हाई पावर कमेटी सदस्य ने प्रबंधन पर उठाए सवाल

डकरा। सीसीएल के एनके एरिया अंतर्गत चूरी भूमिगत कोयला परियोजना में 27 अगस्त को चाल धंसने के बाद मलबे में फंसी कंटीन्यूअस माइनर मशीन को सात दिन बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका है। मशीन को निकालने के लिए लगातार मलबा हटाने और बचाव कार्य जारी है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। मशीन के फंसे होने के कारण परियोजना में कोयला उत्पादन पूरी तरह ठप है। इसका असर एनके एरिया के कुल कोयला उत्पादन पर भी पड़ रहा है।

बताया जाता है कि चूरी परियोजना में प्रतिदिन करीब दो हजार टन कोयले का उत्पादन होता था। लगातार सात दिनों से उत्पादन बाधित रहने के कारण कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, परियोजना में कामकाज प्रभावित होने से श्रमिकों के बीच भी चिंता बनी हुई है।

मामले को लेकर कोल इंडिया हाई पावर कमेटी के सदस्य मनोज कुमार रजक ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए घटना के लिए प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में कमी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि भूमिगत खदानों में चाल की सुरक्षा और नियमित निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि चाल में होने वाले बदलाव का समय रहते पता लगाया जा सके और बड़े हादसे को रोका जा सके।

उन्होंने चाल की निगरानी के लिए ऑटो वार्निंग टेल-टेल, लोड सेल, रिमोट रीडिंग एक्सटेंसोमीटर और इंडिकेटर प्रोब जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं लगाने की मांग की। उनके अनुसार ऑटो वार्निंग टेल-टेल से चाल में होने वाली हलचल और खिसकने के संकेत मिल सकते हैं। लोड सेल से चाल या सपोर्ट पर पड़ने वाले दबाव का पता चलता है, जबकि रिमोट रीडिंग एक्सटेंसोमीटर और इंडिकेटर प्रोब चाल की हलचल तथा असुरक्षित स्थिति के संकेत देने में मदद करते हैं।

मनोज कुमार रजक ने आरोप लगाया कि प्रबंधन मजदूरों की संडे ड्यूटी हटाने और कर्मचारियों पर विभिन्न प्रकार के दबाव बनाने में व्यस्त है, जबकि सुरक्षा और तकनीकी निगरानी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने प्रबंधन से फंसी मशीन को सुरक्षित तरीके से जल्द बाहर निकालने, उत्पादन बहाल कराने, घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। साथ ही चूरी समेत अन्य भूमिगत परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा और आधुनिक तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की।