रांची: राजधानी रांची में खुद को झारखंड सरकार के गृह विभाग का अधिकारी बताकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर प्रभाव जमाने वाले एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से मामला चर्चा में है। पुलिस के मुताबिक आरोपी कभी खुद को गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी, तो कभी स्पेशल ब्रांच का डीएसपी बताकर अधिकारियों से संपर्क करता था। जांच में उसके पास से फर्जी पहचान पत्र, सरकारी पास और कई दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी पिछले करीब एक साल से अलग-अलग पुलिस अधिकारियों और मंत्रालय से जुड़े लोगों के बीच खुद को प्रभावशाली सरकारी अधिकारी के रूप में पेश कर रहा था। वह कथित तौर पर दरोगा, थाना प्रभारियों और डीएसपी स्तर के अधिकारियों से फोन पर संपर्क करता और अपने कथित सरकारी पद का हवाला देकर काम कराने का दबाव बनाता था। रिपोर्ट के मुताबिक, वह कुछ अधिकारियों को यह बताने की कोशिश करता था कि उनकी पोस्टिंग उसके प्रभाव से हुई है। इसी तरह सरकारी काम कराने या प्रभाव दिखाने के नाम पर पैसे अथवा उपहार मांगने के आरोपों की भी पुलिस जांच कर रही है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। मामला तब संदिग्ध हुआ जब आरोपी की गतिविधियों पर पुलिस की नजर गई। उसकी कार पर लगे स्टिकर और पुलिस से संबंधित बोर्ड ने संदेह पैदा किया। इसके बाद पिठौरिया पुलिस ने उसके बारे में गृह विभाग से आधिकारिक जानकारी मांगी। विभागीय सत्यापन में कथित तौर पर यह स्पष्ट हुआ कि जिस नाम और पद का इस्तेमाल आरोपी कर रहा था, उस नाम का संबंधित अधिकारी वहां कार्यरत नहीं था। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की और गिरफ्तारी की कार्रवाई की। पुलिस की कार्रवाई में आरोपी के पास से गृह विभाग से जुड़े फर्जी पहचान पत्र और कार पास, विधानसभा से संबंधित पास तथा अन्य सरकारी दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में मंत्रालय से जुड़े संवेदनशील या गोपनीय दस्तावेजों के उसके कब्जे में मिलने का भी उल्लेख है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी इन दस्तावेजों तक कैसे पहुंचा और क्या उसने मंत्रालय या अन्य सरकारी कार्यालयों में अपनी कथित पहचान का इस्तेमाल करके दस्तावेज हासिल किए थे। मामले का एक अहम पहलू सरकारी फाइल और दस्तावेजों से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी पर मंत्रालय से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज हटाने या गायब करने से संबंधित संदेह भी है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि दस्तावेज उसके पास कैसे पहुंचे और क्या इस काम में किसी अंदरूनी व्यक्ति ने उसकी मदद की थी। गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस उसके संपर्क में रहे लोगों, अधिकारियों को किए गए फोन कॉल, इस्तेमाल किए गए पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेजों के स्रोत पर है। पुलिस यह भी जांच सकती है कि उसने फर्जी अधिकारी बनकर कितने लोगों से संपर्क किया, किन मामलों में हस्तक्षेप की कोशिश की और क्या किसी व्यक्ति से आर्थिक लाभ लिया। अगर जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों और बरामद दस्तावेजों की पुलिस स्तर पर जांच जारी है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।पुलिस अधिकारियों को फोन कर बनाता था दबाव
गाड़ी और पहचान से हुआ शक
सरकारी दस्तावेज और फर्जी पास बरामद
मंत्रालय की फाइलों को लेकर भी जांच
पुलिस कर रही है पूछताछ







