BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

"माया ईश्वर की दासी है - पूज्य स्वामी डॉ निर्मलानंदजी महाराज


ॐ श्री सदगुरवे नमः         

      रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वाधान में चल रहे पक्ष ध्यान साधना शिविर के आठवें दिन के सत्संग में प्रवचन करते हुए पूज्य स्वामी डॉ निर्मलानंदजी महाराज ने कहा कि मैं, मेरा, तैं, तेरा -सब माया है!वस्तुतः माया वह है जिसका कोई अस्तित्व नहीं होता है किन्तु सत्य प्रतीत होता है!आगे विषय की गूढता को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि स्थूल, सुक्ष्म, कारण और महाकारण ये चारो जड़ शरीर हैं!इसके अंदर रहने पर इन्द्रियों का संग बना रहता है और जीव न अपनी पहचान कर पाता है और न ही परमात्मा का साक्षात्कार कर पाता है!इन चारो शरीरों के परे एक पंचम शरीर - कैवल्याशरीर है!यही शरीर परमात्मा का सबसे निकटवर्ती शरीर है!नादानुसन्धान के द्वारा सुरत सब इन्द्रियों से छूटकार कैवल्य शरीर में पहुंचकर अपना और परमात्मा का भी साक्षात्कार करती है!परन्तु यहाँ पर भी द्वैतता बनी रहती है!इसके आगे एक सार शब्द में लीन होने पर द्वैतता मिट जाती है और जीव -पीव एक हो जाता है -जो साधना की पराकाष्ठा है!इस सत्संग में पूज्य स्वामी श्यामाननंदजी महाराज एवं समिति के अध्यक्ष श्री राजकुमार दास ने भी माया पर प्रकाश डाला!  निवेदक :- रांची जिला संतमत सत्संग समिति