BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

Brookfield का ACME के ग्रीन-फ्यूल कारोबार में $600 मिलियन तक निवेश, भारत और ओमान की परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा


अमेरिकी वैकल्पिक निवेश प्रबंधक Brookfield ने भारत की ACME Cleantech Ventures में $600 मिलियन (करीब ₹5,000 करोड़ से अधिक) तक निवेश करने की योजना की घोषणा की है। यह निवेश ACME के ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल जैसे कम-कार्बन ईंधन से जुड़े प्रोजेक्ट्स के विकास और निर्माण में लगाया जाएगा। दोनों कंपनियों ने 17 सितंबर 2026 को इसकी जानकारी दी।

💰 निवेश कहां किया जाएगा?

Brookfield का निवेश ACME के ग्रीन-मॉलिक्यूल्स कारोबार के लिए होगा। इसके तहत भारत और ओमान में ग्रीन अमोनिया, ग्रीन मेथनॉल तथा अन्य कम-कार्बन ईंधन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। ACME के पास इन क्षेत्रों में परियोजनाओं की एक बड़ी पाइपलाइन है और कंपनी घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

यह निवेश Brookfield की Brookfield Global Transition Fund रणनीति के माध्यम से किया जाएगा। कंपनी के लिए यह क्षेत्रीय स्तर पर लो-कार्बन फ्यूल सेक्टर में प्रवेश का महत्वपूर्ण कदम है।

🌱 ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल क्या हैं?

ग्रीन अमोनिया का उत्पादन ऐसी प्रक्रिया से किया जाता है जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा से तैयार हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग उर्वरक उद्योग के अलावा भविष्य में शिपिंग और ऊर्जा क्षेत्र में कम-कार्बन ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

वहीं ग्रीन मेथनॉल नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन स्रोतों पर आधारित उत्पादन प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसे रसायन उद्योग और संभावित रूप से समुद्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में जीवाश्म ईंधन के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

🚢 ACME को पहले से मिले हैं खरीद समझौते

ACME ने अपने ग्रीन-मॉलिक्यूल्स कारोबार के लिए कई संभावित खरीदारों के साथ ऑफटेक/आपूर्ति समझौते किए हैं। इनमें नॉर्वे की Yara International, जापान की IHI Corporation और Mitsubishi Gas Chemical के अलावा भारत की कुछ उर्वरक कंपनियां भी शामिल हैं। इससे भविष्य में उत्पादित ग्रीन ईंधन के लिए बाजार तैयार करने में मदद मिल सकती है।

🇮🇳 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है निवेश?

भारत सरकार ग्रीन हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव्स—जैसे ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल—को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य देश में कम-कार्बन ईंधन का उत्पादन बढ़ाना और भारत को इनके उत्पादन, उपयोग और निर्यात के केंद्र के रूप में विकसित करना है।

ऐसे में Brookfield जैसी बड़ी वैश्विक निवेश कंपनी का पूंजी लगाना इस क्षेत्र में बड़े पैमाने की परियोजनाओं के लिए वित्तीय आधार उपलब्ध करा सकता है। हालांकि, परियोजनाओं की वास्तविक क्षमता और आर्थिक प्रभाव उनके निर्माण, लागत, तकनीक और दीर्घकालीन खरीदार समझौतों पर निर्भर करेगा।

🏭 Brookfield की भारत में पहले से बड़ी मौजूदगी

Brookfield पहले से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय है। Reuters के अनुसार, उसके भारत में संचालित और पाइपलाइन में मौजूद विंड और सोलर एसेट्स की क्षमता करीब 50 GW है। अब ग्रीन-मॉलिक्यूल्स में प्रवेश से कंपनी का भारत का ऊर्जा-परिवर्तन पोर्टफोलियो और विस्तृत हो सकता है।

🌍 वैश्विक बाजार के लिए भी बड़ा कदम

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल की मांग उन उद्योगों में बढ़ने की उम्मीद है जहां उत्सर्जन कम करना कठिन है। खासकर उर्वरक, रसायन और समुद्री परिवहन जैसे क्षेत्रों में कम-कार्बन ईंधन की जरूरत बढ़ रही है। कंपनियां और सरकारें अपने डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जीवाश्म ईंधन के विकल्प तलाश रही हैं।

📌 निवेश का व्यापक असर

इस साझेदारी से:

  • भारत और ओमान में ग्रीन-फ्यूल परियोजनाओं को पूंजी मिल सकती है।
  • ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए कम-कार्बन ईंधन की आपूर्ति बढ़ सकती है।
  • भारत के ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन-एनर्जी इकोसिस्टम में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
  • ACME को अपनी परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय क्षमता मिल सकती है।

🔎 आगे की दिशा

Brookfield का $600 मिलियन तक का निवेश एक साथ पूरी राशि के रूप में लगाए जाने के बजाय परियोजनाओं के विकास और निर्माण की जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है। ACME का फोकस भारत और ओमान में अपनी परियोजना पाइपलाइन को आगे बढ़ाने और घरेलू तथा निर्यात बाजारों के लिए ग्रीन अमोनिया एवं अन्य कम-कार्बन ईंधनों की उत्पादन क्षमता विकसित करने पर है।