BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत से भारत पर आर्थिक दबाव का खतरा, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने जताई चिंता


नई दिल्ली/मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत की आर्थिक चुनौतियों को बढ़ा दिया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि महंगे तेल का असर कीमतों, व्यापार और पूंजी प्रवाह समेत अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों पर पड़ सकता है।

114-115 डॉलर तक पहुंचा भारतीय क्रूड बास्केट

रिपोर्टों के मुताबिक सितंबर में भारत के आयातित कच्चे तेल की कीमत अगस्त के मुकाबले लगभग 30 प्रतिशत बढ़ी। 22 सितंबर को भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत करीब 115.27 डॉलर प्रति बैरल बताई गई, जबकि हाल की रिपोर्टों में इसे लगभग 114 डॉलर के स्तर पर भी बताया गया है।

नागेश्वरन ने मुंबई में आयोजित SBI Banking & Economics Conclave में कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सप्लाई से जुड़े झटके अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं।

महंगे तेल का असर कहां पड़ सकता है?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर देश का तेल आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही परिवहन, उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत पर भी दबाव आने की संभावना रहती है।

महंगा कच्चा तेल रुपये की बाहरी स्थिति और व्यापार संतुलन के लिए भी चुनौती पैदा कर सकता है। हालिया आंकड़ों में अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत के कच्चे तेल आयात बिल में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

महंगाई पर भी नजर

तेल की कीमतों में लगातार तेजी रहने पर इसका असर अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से कंपनियों के उत्पादन खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिसका कुछ हिस्सा आगे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।

हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें कितने समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं और घरेलू बाजार में लागत का कितना हिस्सा आगे स्थानांतरित किया जाता है।

वैश्विक घटनाक्रम बना बड़ा कारण

तेल बाजार में मौजूदा अस्थिरता के पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई रूट को लेकर बनी अनिश्चितता प्रमुख कारकों में शामिल है। 25 सितंबर को Brent crude 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ था, जबकि बाजार की नजर संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता और Strait of Hormuz से जुड़े घटनाक्रम पर थी।

भारत के लिए रणनीतिक भंडार पर जोर

नागेश्वरन ने महत्वपूर्ण वस्तुओं, खासकर तेल के लिए रणनीतिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को प्रमुख कमोडिटीज के लिए पर्याप्त भौतिक भंडार तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वैश्विक आपूर्ति बाधाओं का असर कम किया जा सके।

कुल मिलाकर, कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी भारत के लिए सिर्फ ईंधन लागत का मुद्दा नहीं है। इसका असर आयात बिल, महंगाई, व्यापार संतुलन, रुपये और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक सप्लाई स्थिति पर भारत की नजर महत्वपूर्ण बनी रहेगी।