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IRDAI के नए प्रस्ताव से बीमा शेयरों में जोरदार बिकवाली, PB Fintech 36% तक टूटा


मुंबई। बीमा क्षेत्र में नियामकीय बदलाव के प्रस्ताव का असर शेयर बाजार में साफ दिखाई दिया। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण यानी IRDAI की ओर से बीमा वितरण और कमीशन व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव सामने आने के बाद बीमा कंपनियों और पॉलिसी वितरण से जुड़ी कई कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

सबसे ज्यादा चर्चा PB Fintech, यानी Policybazaar की मूल कंपनी, के शेयरों को लेकर रही। गुरुवार के कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 36 प्रतिशत गिर गया, जो उसके लिए एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई। इस गिरावट के साथ कंपनी के बाजार पूंजीकरण में लगभग 31,425 करोड़ रुपये की कमी आई।

कमीशन व्यवस्था में बदलाव क्यों अहम है?

IRDAI ने बीमा उत्पादों की बिक्री से जुड़े कमीशन और वितरण खर्च को लेकर नए बदलाव प्रस्तावित किए हैं। प्रस्ताव का उद्देश्य बीमा वितरण की लागत और कमीशन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करना है। बाजार में आशंका है कि इससे कुछ बीमा वितरकों की भविष्य की कमाई प्रभावित हो सकती है।

प्रस्तावित बदलावों का असर खास तौर पर उन कंपनियों पर पड़ने की संभावना को लेकर चर्चा हुई है, जिनके कारोबार में बीमा पॉलिसियों की बिक्री से मिलने वाली फीस या कमीशन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऑनलाइन बीमा प्लेटफॉर्म भी इसी वजह से निवेशकों की नजर में रहे।

Turtlemint के शेयर में भी गिरावट

PB Fintech के अलावा बीमा वितरण क्षेत्र की कंपनी Turtlemint के शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला। रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार को इसके शेयर करीब 20 प्रतिशत नीचे आ गए। इससे पता चलता है कि बाजार ने प्रस्तावित नियमों को केवल एक कंपनी तक सीमित मुद्दे के रूप में नहीं देखा, बल्कि पूरे बीमा वितरण मॉडल पर संभावित प्रभाव के तौर पर लिया।

बीमा कंपनियों के शेयर भी दबाव में

बीमा वितरकों के साथ कुछ प्रमुख बीमा कंपनियों के शेयर भी गिरावट की चपेट में आए। HDFC Life और ICICI Prudential Life के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान लगभग 7-8 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में चिंता मुख्य रूप से कमीशन, वितरण लागत और भविष्य की ग्रोथ पर संभावित असर को लेकर रही।

बैंक और NBFC भी निगरानी में

प्रस्तावित बदलावों का प्रभाव केवल बीमा कंपनियों और ऑनलाइन पॉलिसी प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जिन बैंकों और NBFCs की कमाई में बीमा उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली आय की भूमिका है, वे भी संभावित असर के दायरे में हैं। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, कई वित्तीय संस्थानों के लिए बीमा वितरण से होने वाली आय महत्वपूर्ण है।

निवेशकों की चिंता क्या है?

बाजार की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से इस आशंका से जुड़ी है कि यदि कमीशन और वितरण से जुड़े भुगतान में कमी आती है, तो कुछ कंपनियों की आय पर दबाव पड़ सकता है। विश्लेषकों ने विशेष रूप से ऑनलाइन बीमा वितरकों के बिजनेस मॉडल पर संभावित असर को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये प्रभाव अभी प्रस्तावित नियमों के अंतिम स्वरूप और उनके लागू होने के तरीके पर निर्भर करेंगे।

अभी अंतिम नियम नहीं

यह ध्यान रखना जरूरी है कि IRDAI का कदम प्रस्ताव/कंसल्टेशन के स्तर पर है। इसलिए मौजूदा बाजार गिरावट को अंतिम नियामकीय व्यवस्था का परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। आगे मिलने वाली प्रतिक्रियाओं, संशोधनों और अंतिम नियमों के आधार पर कंपनियों पर वास्तविक प्रभाव की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

फिलहाल IRDAI के प्रस्ताव ने बीमा वितरण क्षेत्र की कमाई और बिजनेस मॉडल को लेकर बाजार में नई चर्चा शुरू कर दी है। इसी वजह से बीमा कंपनियों, ऑनलाइन पॉलिसी प्लेटफॉर्म, बैंकों और NBFCs से जुड़े शेयरों में निवेशकों की नजर इस नियामकीय प्रक्रिया के अगले चरण पर बनी हुई है।