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मोतियाबिंद: लक्षण, उपचार एवं रोकथाम की जानकारी


रांची, 16 सितंबर 2026। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड एवं स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार की ओर से जारी जागरूकता सामग्री के माध्यम से लोगों को मोतियाबिंद के लक्षण, उपचार और रोकथाम के प्रति जागरूक किया गया है। मोतियाबिंद में आंख के लेंस में बदलाव के कारण दृष्टि प्रभावित हो सकती है।

जागरूकता सामग्री के अनुसार, मोतियाबिंद के प्रमुख लक्षणों में दृष्टि में धुंधलापन या अस्पष्टता, बुजुर्गों में निकट दृष्टि दोष में लगातार बढ़ोतरी, रंगों को देखने की क्षमता में बदलाव, रात में वाहन चलाने में दिक्कत और दिन के समय आंखों में चौंधियापन शामिल हैं। इसके अलावा दोहरी दृष्टि (डबल विजन), चश्मे के नंबर में अचानक बदलाव और उम्र बढ़ना भी इससे जुड़े कारक हो सकते हैं।

मोतियाबिंद का प्रमुख उपचार ऑपरेशन है। ऑपरेशन के दौरान आंख से धुंधला लेंस निकालकर उसकी जगह कृत्रिम लेंस लगाया जाता है। जागरूकता सामग्री में इसे सुरक्षित एवं सरल प्रक्रिया बताया गया है तथा आवश्यकता के अनुसार इसका उपचार कराया जा सकता है।

मोतियाबिंद की रोकथाम और आंखों के स्वास्थ्य के लिए 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच, अपना वजन सामान्य बनाए रखने, रंग-बिरंगे फलों एवं सब्जियों को भोजन में शामिल करने तथा धूम्रपान छोड़ने और शराब का सेवन कम करने की सलाह दी गई है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड की ओर से यह भी बताया गया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में नेत्र जांच एवं उपचार की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है। लोगों से आंखों से संबंधित परेशानी होने पर समय पर जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई है।