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अपराध से अध्यात्म की ओर: देवघर जेल में बंदियों ने तैयार किया बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ का "नाग पुष्प मुकुट"


अपराध से अध्यात्म की ओर: देवघर जेल में बंदियों ने तैयार किया बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ का "नाग पुष्प मुकुट"

• 1911 से चली आ रही है परंपरा


अमित कुमार,
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो 


देवघर : सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुक्रवार को देवघर मंडल कारा में एक अनूठी परंपरा निभाई गई। यहां बंदियों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए दो दिव्य "नाग पुष्प मुकुट" बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकिनाथ को अर्पित किए गए। एक मुकुट बनाने में करीब पांच किलो फूलों का उपयोग किया गया।

परंपरा के अनुसार जेल में तैयार दोनों मुकुट को मंदिर भेजने से पहले सुरक्षित रखा गया। इनमें से एक मुकुट बाबा बासुकिनाथ की श्रृंगार पूजा के लिए सुरक्षाकर्मी के साथ भेजा गया, जबकि दूसरा मुकुट जेलर प्रमोद कुमार व अन्य कर्मी बाबा बैद्यनाथ मंदिर लेकर पहुंचे।

इस अवसर पर देवघर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर झा ने "नाग पुष्प मुकुट" को कंधे पर उठाकर जेल के मुख्य द्वार तक लाया, जो बंदियों के लिए गर्व और सुधार का प्रतीक बना।

इस संबंध में जेलर प्रमोद कुमार ने बताया कि यह परंपरा अंग्रेज जेलर के समय से वर्ष 1911 से लगातार चली आ रही है। हर दिन बंदियों द्वारा बाबा बैद्यनाथ के लिए पुष्प मुकुट तैयार किया जाता है, जबकि महाशिवरात्रि पर बाबा को विशेष मोर अर्पित किया जाता है। सावन पूर्णिमा पर दो मुकुट तैयार करने की विशेष परंपरा है।

जेलर के अनुसार ऐसी अनूठी परंपरा सिर्फ देवघर जेल में ही निभाई जाती है। इतना ही नहीं लंबे समय से प्रत्येक वर्ष 03 दिनों तक भक्तिमय कार्यक्रम का आयोजन होता आ रहा है।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन का सबसे बड़ा उद्देश्य बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करना है। जब बंदी अपने हाथों से बाबा के लिए फूलों का मुकुट बनाते हैं, भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं तो उनके मन में पश्चाताप और सुधार की भावना जागती है।

कई बंदी इस दौरान गलत रास्ता छोड़कर अच्छे कर्म करने का संकल्प लेते हैं। जेल की चारदीवारी के भीतर गूंजते बाबा के जयकारे उन्हें अपराध से अध्यात्म की ओर ले जाते हैं। यह पहल बंदियों के पुनर्वास और मानसिक सुधार की दिशा में एक मिसाल है।

कार्यक्रम में पीडीजे कौशल किशोर झा के अलावा कई न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी और गणमान्य लोग शामिल हुए। इस आयोजन को सफल बनाने में प्रभारी जेल अधीक्षक हीरा कुमार, रविंद्र महथा, रोशन कुमार, मिथिलेश कुमार, पवन रुण्डा, भूदेव राय, शंभू चौधरी, धीरेंद्र ठाकुर, दयानंद राय सहित सभी जेल कर्मियों की सराहनीय भूमिका रही।