BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

देवघर में राजस्व विभाग की बड़ी लापरवाही: सारठ के 390 में से 291 गांवों के खतियान 9 साल से गायब.


•‌ जमीन के कागज के लिए भटक रहे ग्रामीण.

रांची एक्सप्रेस ब्यूरो 

देवघर : देवघर जिले के सारठ अंचल से राजस्व व्यवस्था की पोल खोलने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां के कुल 390 गांवों में से 291 गांवों का सबसे महत्वपूर्ण भू-अभिलेख खतियान ही अंचल कार्यालय में मौजूद नहीं है। खतियान गायब होने से हजारों ग्रामीण अपनी ही जमीन के कागजात के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सारठ अंचल में 46 बेचिरागी, 203 खास, 129 प्रधानी जोत और 58 मूल रैयती गांव हैं। इनमें से 291 गांवों के खतियान नदारद हैं। खतियान के बिना दाखिल-खारिज, लगान रसीद, पंजी-2 और जाति, आवासीय जैसे प्रमाण पत्रों के काम ठप पड़े हैं।

उल्लेखनीय है कि खतियान जमीन के मालिकाना हक का सबसे बड़ा सबूत होता है। इसके नहीं होने से जमीन के पुराने रिकॉर्ड की जांच नहीं हो पा रही है। इसका सीधा फायदा भू-माफियाओं को मिल रहा है और जमीन विवादों में तेजी आई है। राजस्व कर्मी भी बिना रिकॉर्ड के काम करने को मजबूर हैं। 

जिला या अनुमंडल से जांच रिपोर्ट मांगे जाने पर कर्मी आवेदक द्वारा दी गई फोटोकॉपी और गांव में पूछताछ के आधार पर ही रिपोर्ट बना देते हैं, जिससे असली मालिक को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

2017 में लिखा गया पत्र, 9 साल बाद भी फाइलों में धूल

यह लापरवाही नई नहीं है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि 3 अक्टूबर 2017 को तत्कालीन अंचल अधिकारी ने अपर उपायुक्त और जिला अभिलेखागार को पत्र लिखकर 291 गांवों के खतियान की प्रतियां मांगी थीं। 9 साल बीत गए, लेकिन आज तक रिकॉर्ड अंचल कार्यालय नहीं पहुंचा। सवाल उठता है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को दबाकर कौन रखे हुए है और क्यों?

विधायक की चिट्ठी भी बेअसर

चार माह पहले प्रखंड के जनता दरबार में ग्रामीणों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। इसके बाद वर्तमान सारठ विधायक उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह ने खुद देवघर उपायुक्त को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया और खतियान उपलब्ध कराने की मांग की। लेकिन 04 महीने बीत जाने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

आधे से ज्यादा दाखिल-खारिज रिजेक्ट

खतियान और पंजी-2 अपडेट नहीं होने का सबसे बड़ा खामियाजा आम ग्रामीण भुगत रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा दाखिल-खारिज आवेदन सिर्फ इस कारण रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। ग्रामीण बालो पंडित, लक्ष्मी देवी ने बताया कि वर्षों पहले जमीन खरीदने और रजिस्ट्री होने के बावजूद पंजी-2 अपडेट नहीं होने का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया जाता है। पिछले पांच साल के ऑनलाइन आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं।

क्या कहते हैं सीओ
==================
सारठ के वर्तमान अंचल अधिकारी 'कृष्ण चंद्र सिंह मुंडा' ने स्वीकार किया कि पंचायत समिति की बैठक में 291 गांवों के खतियान गायब होने का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि उनके स्तर से भी जिला कार्यालय को पत्र लिखकर खतियान उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या 9 साल से गायब 291 गांवों के खतियान जिला अभिलेखागार की धूल फांकती अलमारियों में कैद हैं या फिर किसी बड़ी साजिश के तहत इन्हें गायब किया गया है? हजारों ग्रामीणों की जमीन का भविष्य अधर में है।