किन्शासा: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला के खिलाफ स्वास्थ्य एजेंसियों का अभियान लगातार जारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, देश के कुछ प्रभावित इलाकों में संक्रमण की रफ्तार कम होने के संकेत मिले हैं, लेकिन दूसरी ओर नॉर्थ किवु प्रांत में नए मामलों का बढ़ना चिंता का कारण बना हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में किसी व्यापक सुधार का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। यह प्रकोप Bundibugyo वायरस के कारण फैल रहा है। WHO के अनुसार इस वायरस के खिलाफ अभी कोई लाइसेंस प्राप्त विशिष्ट टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है, हालांकि टीकों और उपचारों के उम्मीदवारों पर परीक्षण चल रहे हैं। इटुरी प्रांत लंबे समय से इस प्रकोप का प्रमुख केंद्र रहा है। हालिया WHO आंकड़ों के मुताबिक, इटुरी में संक्रमण और मौतों की हिस्सेदारी अब पहले की तुलना में घट रही है। इसका संकेत है कि निगरानी, संक्रमित लोगों की पहचान, उपचार और संक्रमण रोकने के उपाय कुछ इलाकों में असर डाल रहे हैं। हालांकि WHO अधिकारियों ने इसे अभी जीत नहीं माना है। संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा है कि प्रतिक्रिया में प्रगति हुई है, लेकिन वायरस अभी भी कई जगहों पर फैल रहा है और कई संक्रमण शृंखलाओं का पता लगाना बाकी है। जहां इटुरी में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, वहीं नॉर्थ किवु में संक्रमण बढ़ रहा है। WHO और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक इस क्षेत्र में हाल के सप्ताहों में नए मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे आशंका है कि संक्रमण मुख्य केंद्र से दूसरे इलाकों में फैल रहा है। नॉर्थ किवु पहले से ही सुरक्षा और मानवीय संकट से प्रभावित क्षेत्र है। हिंसा, विस्थापन और लोगों की लगातार आवाजाही स्वास्थ्यकर्मियों के लिए संक्रमित लोगों और उनके संपर्कों का पता लगाना कठिन बना सकती है। WHO के 13 सितंबर के साप्ताहिक अपडेट के अनुसार, कांगो में कुल 7,258 पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके थे और 3,510 लोगों की मौत हुई थी। उस समय तक संक्रमण देश के सात प्रांतों और 62 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुंच चुका था। इटुरी अभी भी कुल मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा दर्ज करता है, लेकिन उसका सापेक्ष योगदान घट रहा है। इसके विपरीत नॉर्थ किवु में संक्रमण बढ़ने की स्थिति ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रकोप की भौगोलिक सीमा भी लगातार बढ़ी है। WHO के मुताबिक सितंबर के मध्य तक साउथ उबांगी देश का सातवां प्रभावित प्रांत बन गया, जहां बुलु स्वास्थ्य क्षेत्र में पहला पुष्ट मामला सामने आया। यह विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साउथ उबांगी की सीमाएं सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और रिपब्लिक ऑफ कांगो से लगती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ सकता है। WHO के अनुसार इस प्रकोप की एक बड़ी समस्या यह है कि कई मौतें स्वास्थ्य केंद्रों के बजाय समुदायों में हो रही हैं। ऐसे मामलों में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी मुश्किल हो जाती है। WHO प्रमुख ने यह भी चिंता जताई है कि कुछ मृतकों का सुरक्षित तरीके से अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा है। इबोला जैसे अत्यधिक संक्रामक रोग में सुरक्षित शव प्रबंधन संक्रमण की शृंखला तोड़ने का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा कुछ लोगों की मौत ऐसे समय हुई जब वे पहले से ज्ञात संपर्कों की सूची में शामिल नहीं थे। इससे संकेत मिलता है कि संक्रमण की कुछ ऐसी कड़ियां मौजूद हैं जिनका स्वास्थ्य अधिकारियों को अभी पता नहीं चला है। बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। WHO के अनुसार 1 सितंबर तक इटुरी में 25 स्वास्थ्य सुविधाएं इबोला मरीजों की देखभाल के लिए काम कर रही थीं। इनमें 15 उपचार केंद्र और 10 ट्रांजिट केंद्र शामिल थे, जिनकी कुल क्षमता 974 बिस्तरों की थी। पूरे प्रभावित क्षेत्र में 59 सुविधाओं की पहचान की गई थी, जिनमें कुल 1,346 बिस्तरों की क्षमता थी। WHO के मुताबिक प्रतिक्रिया अभियान की शुरुआत में केवल नौ बिस्तरों वाला एक उपचार केंद्र सक्रिय था। इसके बाद 4,000 से अधिक अतिरिक्त स्वास्थ्यकर्मियों को भी तैनात किया गया। Bundibugyo वायरस इस प्रकोप को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनाता है। WHO के अनुसार इस वायरस के खिलाफ फिलहाल कोई लाइसेंस प्राप्त विशिष्ट टीका या उपचार मौजूद नहीं है। हालांकि इस दिशा में वैज्ञानिक काम तेजी से चल रहा है। WHO के अनुसार तीन टीके और तीन उपचार विकल्प क्लिनिकल परीक्षणों में हैं। इसके अलावा मौजूदा लाइसेंस प्राप्त Ervebo टीके के आपातकालीन इस्तेमाल को लेकर भी WHO ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। कांगो में संक्रमण के लगातार नए क्षेत्रों में पहुंचने से पड़ोसी देशों के लिए भी निगरानी बढ़ाना जरूरी हो गया है। WHO के अनुसार आधिकारिक हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमा चौकियों पर स्वास्थ्य जांच तथा निगरानी जारी है, लेकिन अनौपचारिक सीमा मार्गों से लोगों की आवाजाही एक चुनौती बनी हुई है। अफ्रीका के कई हिस्सों में सीमा पार व्यापार और लोगों की आवाजाही काफी अधिक है। इसलिए किसी एक क्षेत्र में संक्रमण पर नियंत्रण होने के बावजूद दूसरे इलाके से नए संक्रमण सामने आने की संभावना बनी रह सकती है। पूर्वी कांगो में इबोला का मुकाबला केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं है। प्रभावित इलाकों में पहले से ही विस्थापन, संघर्ष, गरीबी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसी समस्याएं मौजूद हैं। WHO ने बताया है कि दूरदराज और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के साथ-साथ असुरक्षा और लोगों की आवाजाही ने प्रतिक्रिया अभियान को जटिल बनाया है। ऐसे माहौल में स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों तक पहुंचाने, दवाएं और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए विशेष लॉजिस्टिक सहायता की आवश्यकता पड़ रही है। दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा सामग्री को पहुंचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की हवाई सहायता भी इस्तेमाल की जा रही है। WHO के अनुसार संयुक्त राष्ट्र मानवीय हवाई सेवा (UNHAS) प्रतिक्रिया टीमों और जरूरी सामान को उन क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद कर रही है जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है।इटुरी में दिखे कुछ सकारात्मक संकेत
नॉर्थ किवु में बढ़ते मामले नई चुनौती
अब तक 7,000 से ज्यादा मामले
सातवें प्रांत तक पहुंचा संक्रमण
समुदायों में संक्रमण रोकना सबसे बड़ी चुनौती
अस्पताल और उपचार केंद्र बढ़ाए गए
टीके और दवाओं पर शोध जारी
सीमा पार फैलने का खतरा
सुरक्षा और मानवीय संकट से जंग और मुश्किल
राहत अभियान में हवाई सहायता भी
कांगो में इबोला के खिलाफ अभियान जारी, कुछ इलाकों में सुधार के संकेत; नॉर्थ किवु में बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता






