न्यूयॉर्क, 24 सितंबर (हि.स)। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अपने देश के रोहिंग्या मुद्दे पर दुनिया का ध्यान खींचा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर "रोहिंग्या संकट: लंबे समय तक विस्थापन से न्याय और जवाबदेही के साथ टिकाऊ समाधान के लिए एक नई अपील" विषयक सम्मेलन में विचार रखे। उन्होंने पांच सूत्रीय प्रस्ताव रखते हुए रोहिंग्याओं को म्यांमार भेजने का भरोसेमंद रोडमैप बनाने की अपील की।
बांग्लादेश के अखबार ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, तारिक रहमान ने कहा कि अब विस्थापन को खत्म करने की ओर बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, "अब समय आ गया है कि सहानुभूति से असली कारणों और उनके समाधानों की तलाश की जाए। भरोसेमंद कार्रवाई की जाए।" प्रधानमंत्री ने यह प्रस्ताव बांग्लादेश में शरण लिए हुए 1.2 मिलियन से ज्यादा रोहिंग्याओं की बुरी हालत पर रोशनी डालते हुए दिया। तारिक विश्व समुदाय से उनकी सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के लिए हालात बनाने के लिए पक्के इरादे के साथ अपनी जिम्मेदारी उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा, "बांग्लादेश नहीं चाहता कि रोहिंग्या हमेशा के लिए बेघर रहें। हम चाहते हैं कि वे म्यांमार में अपने घरों में सुरक्षित, अपनी मर्जी से, सम्मान के साथ और अपने अधिकारों की रक्षा के साथ लौटें।" तारिक ने आगे कहा, "बांग्लादेश ने इंसानियत के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई है। अगर जरूरी हालात बनते हैं तो बांग्लादेश उनकी वापसी में मदद करने के लिए तैयार रहेगा।" इस सम्मेलन का आयोजन बांग्लादेश और गाम्बिया ने संयुक्त रूप से किया। इसमें अलग-अलग देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए ।
उन्होंने म्यांमार में रोहिंग्याओं समेत आम लोगों के खिलाफ हिंसा खत्म करने की मांग की और इस बात पर जोर दिया कि वापसी के लिए भरोसा वापस पाने के लिए उनके अपने देश में उनके बुनियादी अधिकारों और सुरक्षा की गारंटी होनी चाहिए। रोहिंग्याओं की लगातार वापसी पक्का करने के लिए न्याय और जवाबदेही जरूरी है, साथ ही उन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के सामने जवाबदेही तय करने में गाम्बिया की भूमिका की तारीफ की।
तारिक ने रोहिंग्या संकट को म्यांमार से शुरू हुआ बताते हुए कहा, "यह संकट म्यांमार से शुरू हुआ। इसका हल म्यांमार में है।" उन्होंने कहा कि रखाइन राज्य में हालात बहुत चिंताजनक बने हुए हैं। वहां रोहिंग्याओं को गंभीर उल्लंघन और बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "म्यांमार मिलिट्री और अराकान आर्मी दोनों ने गंभीर उल्लंघन किए हैं। ऐसे में, सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के हालात मुश्किल बने हुए हैं।"
प्रधानमंत्री तारिक ने कहा कि बांग्लादेश नौ साल से ज्यादा समय से रोहिंग्याओं को होस्ट कर रहा है। लगभग 6,000 लर्निंग सेंटर के जरिए म्यांमार के करिकुलम के आधार पर खाना, हेल्थकेयर और शिक्षा दे रहा है। इसके अलावा रोहिंग्या युवाओं को कैपेसिटी-बिल्डिंग और स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग भी दे रहा है। उन्होंने कहा, "हालांकि, इंसानी उदारता राजनीतिक निष्क्रियता का बहाना नहीं बन सकती। बांग्लादेश से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह हमेशा यह जिम्मेदारी उठाएगा।" रहमान ने चेतावनी दी कि लंबे समय तक विस्थापन से नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो रही हैं, जिनमें मानव तस्करी, प्रवासियों की तस्करी, ड्रग तस्करी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय अपराध शामिल हैं। उन्होंने कहा, "एक देश में अगर कोई संकट सुलझा नहीं, तो वह पूरे इलाके के लिए सुरक्षा चुनौती बन सकता है।"
तारिक रहमान ने बांग्लादेश के रोहिंग्या मुद्दे पर दुनिया का ध्यान खींचा






