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अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ाई, डॉलर सात सप्ताह के उच्च स्तर पर


वॉशिंगटन: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। 16 सितंबर 2026 को हुई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में दर को बढ़ाकर 3.75% से 4% की लक्ष्य सीमा में कर दिया गया। फेड का कहना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर है।

तीन साल बाद पहली बार बढ़ी दर

यह बढ़ोतरी खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने तीन साल से अधिक समय बाद पहली बार ब्याज दर बढ़ाई है। फेड के फैसले को महंगाई को 2% के लक्ष्य की ओर तेजी से वापस लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

फेड का फैसला 12-0 के सर्वसम्मत मत से हुआ। केंद्रीय बैंक ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गतिविधियां ठोस गति से बढ़ रही हैं, घरेलू खर्च मजबूत है और उत्पादकता तथा पूंजी निवेश में भी मजबूती बनी हुई है। दूसरी ओर, महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक के 2% लक्ष्य से ऊपर है।

आगे भी बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

फेड के नए आर्थिक अनुमानों से संकेत मिला है कि मौजूदा साल में एक और दर बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। Reuters के अनुसार, 18 में से 16 फेड नीति-निर्माताओं ने 2026 के अंत तक कम-से-कम एक और 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी का अनुमान दिया है। केवल दो अधिकारियों ने दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का अनुमान जताया।

इसका मतलब यह है कि बाजार अब केवल मौजूदा बढ़ोतरी पर नहीं, बल्कि फेड की अगली बैठकों में आने वाले संकेतों पर भी नजर रख रहा है।

ब्याज दर बढ़ते ही डॉलर मजबूत

फेड के फैसले के बाद अमेरिकी डॉलर में तेजी देखने को मिली। डॉलर इंडेक्स 100.33 तक पहुंच गया, जो 31 जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। यानी डॉलर करीब सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया।

अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले भी डॉलर मजबूत हुआ। यूरो करीब 1.1456 डॉलर तक कमजोर हुआ, जबकि येन लगभग 156.20 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था।

डॉलर क्यों मजबूत हुआ?

ब्याज दर बढ़ने से अमेरिकी परिसंपत्तियों पर मिलने वाला संभावित रिटर्न बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की अमेरिकी डॉलर वाली परिसंपत्तियों में दिलचस्पी बढ़ सकती है। इस बार डॉलर की मजबूती को खास तौर पर फेड के इस संकेत से भी बल मिला कि आने वाले महीनों में और दर बढ़ोतरी संभव है।

Reuters के अनुसार, बाजार ने फेड के फैसले और नए मार्गदर्शन को अपेक्षाकृत सख्त मौद्रिक नीति के संकेत के रूप में लिया, जिसके बाद डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई।

महंगाई बनी मुख्य चिंता

फेड ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि महंगाई अभी भी ऊंची है और मौजूदा कदम का उद्देश्य कीमतों को केंद्रीय बैंक के 2% लक्ष्य की दिशा में अधिक तेजी से लाना है। फेड ने यह भी कहा कि रोजगार बाजार में बढ़ोतरी कार्यबल की वृद्धि के अनुरूप रही है और बेरोजगारी दर में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है।

इसलिए फेड के सामने फिलहाल दो प्रमुख आर्थिक लक्ष्य हैं—महंगाई को नियंत्रित करना और अर्थव्यवस्था तथा रोजगार बाजार पर अत्यधिक दबाव नहीं पड़ने देना।

अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर भी असर

फेड की घोषणा के बाद अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में भी हलचल रही। Reuters के मुताबिक 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, जो सोमवार को 5% से ऊपर 19 साल के उच्च स्तर तक पहुंच गई थी, घोषणा के बाद करीब 4.958% पर थी।

उच्च ब्याज दरों का असर अमेरिका में कर्ज की लागत पर भी पड़ सकता है। समय के साथ इसका प्रभाव होम लोन, कारोबारी कर्ज और अन्य उधारी की दरों पर दिखाई दे सकता है, हालांकि हर प्रकार की ब्याज दर सीधे फेड की नीति दर के बराबर नहीं बदलती।

आगे बाजार की नजर किन चीजों पर?

अब निवेशक मुख्य रूप से इन संकेतकों पर नजर रखेंगे:

  • अमेरिका में महंगाई के आगामी आंकड़े
  • रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े
  • उपभोक्ता खर्च और आर्थिक वृद्धि
  • तेल और ऊर्जा की कीमतें
  • अगले FOMC बैठकों में फेड अधिकारियों के संकेत
  • अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर की दिशा
  • अन्य बड़े केंद्रीय बैंकों, खासकर बैंक ऑफ जापान और बैंक ऑफ इंग्लैंड, के फैसले

Reuters के अनुसार, बाजार में अब अगले संभावित फेड कदम के साथ-साथ बैंक ऑफ जापान के आगामी फैसले पर भी विशेष ध्यान है।

भारत और वैश्विक बाजार पर संभावित असर

अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। मजबूत डॉलर से कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव आ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए डॉलर की मजबूती आयात लागत और विदेशी पूंजी के प्रवाह को प्रभावित करने वाला कारक हो सकती है।

हालांकि, भारतीय बाजार पर वास्तविक प्रभाव कई अन्य कारकों—जैसे कच्चे तेल की कीमत, RBI की मौद्रिक नीति, विदेशी निवेश और रुपये की मांग—पर भी निर्भर करेगा।

एक नजर में

मुद्दाजानकारी
फेड का फैसलाब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी
नई दर सीमा3.75%–4.00%
फैसले की तारीख16 सितंबर 2026
मतदान12-0, सर्वसम्मत
मुख्य कारणमहंगाई अभी भी ऊंची
2026 में आगे का संकेतएक और बढ़ोतरी की संभावना
डॉलर इंडेक्स100.33 तक पहुंचा
डॉलर की स्थितिसात सप्ताह के उच्च स्तर के करीब/पर
अगला फोकसमहंगाई, रोजगार और अगली Fed बैठक