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अदालत से बेदाग बरी बुजुर्ग डीलर ने DM से लगाई गुहार: "मेरी ढलती उम्र का सहारा राशन लाइसेंस वापस लौटाएं"


•मामला: वर्ष 2021 में दर्ज झूठे मामले(कांड संख्या-65/21)के कारण लाइसेंस(27/16)रद्द कर दिया गया था•

•न्यायालय का फैसला: एसडीएम सिविल कोर्ट,जमुई ने 13 मार्च 2026 को सम्मानपूर्वक दोषमुक्त(बरी)किया।•

•मांग: रद्द लाइसेंस को अविलंब बहाल किया जाए और उक्त सीट पर जारी नई बहाली प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।•

•न्याय मिलने के बाद भी दर-दर भटकने को मजबूर 70-वर्षीय बुजुर्ग•

मुकेश कुमार-स्टेट ब्यूरो चीफ

पटना(बिहार)।"चार साल तक षड्यंत्र का दंश झेला,अदालत ने बेदाग साबित किया...लेकिन अब मेरा बुढ़ापे का इकलौता सहारा छीना जा रहा है।" यह दर्दनाक दास्तान है जमुई जिले के ई.अलीगंज प्रखंड के आढ़ा पंचायत निवासी मोहम्मद हबीब मलिक की,जिन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जमुई के जिला पदाधिकारी को आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।मामले के अनुसार,वर्ष 2021 में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 के तहत उन पर केस दर्ज कराया गया था।इसके बाद 8 फरवरी 2022 को विभाग द्वारा उनका जन वितरण प्रणाली लाइसेंस रद्द कर दिया गया।बुजुर्ग हबीब मलिक का कहना है कि इस फैसले ने न केवल उनके परिवार की आजीविका छीनी,बल्कि दशकों से कमाई मान-प्रतिष्ठा को भी तार-तार कर दिया।
•अदालत ने दिए बरी करने के आदेश•
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद,एसडीएम सिविल कोर्ट(जमुई)ने 13 मार्च 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मोहम्मद हबीब मलिक को सभी आरोपों से ससम्मान दोषमुक्त कर दिया।अदालत के फैसले से साफ हो गया कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार थे।कोर्ट से न्याय मिलने के बाद राहत की उम्मीद जगी थी,लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा उक्त रिक्त स्थान पर नई बहाली प्रक्रिया शुरू करने से उनके पैरों तले जमीन खिसक गई है।हबीब मलिक ने बताया कि लाइसेंस रद्द होने से परिवार के सामने भुखमरी की नौबत आ चुकी है।जिलाधिकारी को दिए पत्र में उन्होंने मांग की है कि माननीय न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए उनका लाइसेंस(27/16)अविलंब बहाल किया जाए।उक्त स्थान पर चल रही नई बहाली प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।

[ "मैं जीवन के उस ढलान पर हूं जहां शरीर साथ छोड़ रहा है।यह डीलरशिप केवल व्यवसाय नहीं,बल्कि मेरे बुढ़ापे और परिवार के अस्तित्व का आधार है।मुझे जमुई प्रशासन पर पूरा भरोसा है कि वे मेरे सफेद बालों और न्यायालय के फैसले का सम्मान करेंगे।"
—मोहम्मद हबीब मलिक(पीड़ित बुजुर्ग डीलर)]

अब देखना यह होगा कि कोर्ट से बेदाग साबित हुए इस निर्दोष बुजुर्ग को जिला प्रशासन कब तक उनका छीना हुआ हक वापस दिलाता है।फिलहाल यह गुहार की अर्जी जिलाधिकारी के न्यायालय में लगभग तीन माह से लंबित हैं।