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एनआईटी जमशेदपुर में राष्ट्रीय महिला नेतृत्व सम्मेलन-2026 का आयोजन, महिला शिक्षा, संस्कार और नेतृत्व पर हुआ मंथन


महिला शिक्षा के साथ परंपरा, सामाजिक परिवर्तन और भविष्य की चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

जमशेदपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर में “महिला शिक्षा और संस्कार : परंपरा, परिवर्तन और भविष्य-दृष्टि” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का बुधवार को शुभारंभ हुआ। 9 एवं 10 सितंबर 2026 को आयोजित इस संगोष्ठी में महिला शिक्षा, नेतृत्व, भारतीय दृष्टि, सामाजिक परिवर्तन, ऐतिहासिक एवं समकालीन परिप्रेक्ष्य तथा भविष्य की चुनौतियों पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विचार साझा किए।

उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. शीतल कुमारी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। कार्यक्रम में डॉ. शुक्ला महंती, पूर्व कुलपति, कोल्हान विश्वविद्यालय एवं कार्यक्रम संयोजिका; सुश्री शोभा पाठक, राष्ट्रीय संयोजिका, महिला कार्य, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास; प्रो. गौतम सूत्रधार, निदेशक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर; डॉ. आशा लकड़ा, सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग; तथा प्रो. पंकज मित्तल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं कुलाधिपति, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सरोज कुमार सारंगी, कुलसचिव, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर ने किया।

महिला नेतृत्व को अवसर और शिक्षा से मिलेगी नई दिशा

अपने संबोधन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने कहा कि किसी भी विकसित और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। महिलाओं को समान अवसर देने के साथ-साथ उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और उपयुक्त मंच उपलब्ध कराना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा और संस्कृति में महिलाओं को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त रहा है। आज आवश्यकता है कि इस समृद्ध परंपरा को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक तथा नेतृत्व क्षमता के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने महिला सशक्तीकरण की आधारशिला के रूप में शिक्षा को रेखांकित करते हुए उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रो. सूत्रधार ने कहा कि नेतृत्व केवल किसी पद पर आसीन होने का नाम नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी लेने, सही निर्णय करने, दूसरों को साथ लेकर चलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता है। उन्होंने युवा छात्राओं एवं महिलाओं से आत्मविश्वास, अनुशासन, संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

जनजातीय महिलाओं में नेतृत्व की अपार क्षमता : डॉ. आशा लकड़ा

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि जनजातीय समाज की महिलाओं में नेतृत्व की अपार क्षमता है। आवश्यकता है कि उनकी प्रतिभा, परंपरागत ज्ञान और अनुभव को उचित अवसर एवं मंच प्रदान किया जाए।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज में महिलाएं परिवार, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और सामुदायिक जीवन की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय ज्ञान और परंपराओं के संरक्षण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने जनजातीय महिलाओं की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. लकड़ा ने कहा कि शिक्षा महिलाओं को अपने अधिकारों, संवैधानिक प्रावधानों और उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक बनाती है। इसके साथ ही कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और तकनीकी ज्ञान के अवसर उपलब्ध कराकर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय महिलाओं की आवाज को विकास की मुख्यधारा में उचित स्थान मिलना चाहिए। विकास के साथ जनजातीय संस्कृति, परंपरा और पहचान का संरक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने महिला सशक्तीकरण को पूरे समाज की जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि एक सशक्त महिला परिवार और समाज में व्यापक परिवर्तन की शुरुआत कर सकती है।

महिला शिक्षा के विविध आयामों पर चार सत्रों में चर्चा

संगोष्ठी के प्रथम दिवस के प्रथम तकनीकी सत्र का विषय “21वीं सदी की महिला शिक्षा : संस्कार, मूल्य और सामाजिक परिवर्तन” रखा गया। इस सत्र में शिक्षा के साथ संस्कार, मूल्यबोध और सामाजिक परिवर्तन के संबंध पर विचार-विमर्श किया गया।

द्वितीय सत्र में “महिला शिक्षा : परंपरा, आधुनिकता और पाठ्यक्रम की भारतीय दृष्टि” विषय पर चर्चा हुई। इसमें भारतीय दृष्टिकोण के संदर्भ में महिला शिक्षा, परंपरा और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के बीच समन्वय पर विचार रखा गया।

संगोष्ठी के दूसरे दिन “महिला शिक्षा : ऐतिहासिक, सामाजिक परिप्रेक्ष्य और भारतीय पाठ्यक्रम की दृष्टि” तथा “समकालीन चुनौतियां और समाधान” विषयों पर क्रमशः तृतीय एवं चतुर्थ सत्र आयोजित किए जाएंगे। समापन सत्र में विभिन्न वक्ताओं एवं अतिथियों के विचारों के साथ संगोष्ठी के निष्कर्षों पर चर्चा होगी।

आयोजकों के अनुसार संगोष्ठी का उद्देश्य महिला शिक्षा को केवल शैक्षणिक उपलब्धि के रूप में देखने के बजाय उसे संस्कार, मूल्य, नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण से जोड़कर व्यापक दृष्टिकोण विकसित करना है।

कार्यक्रम की जानकारी संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. रत्नेश कुमार मिश्रा ने दी।