बेरमो/बोकारो।
बेरमो में ‘जीरो कोल लीकेज’ का दावा, फिर भी जारी कोयले का अवैध कारोबार..
अलका मिश्रा की रिपोर्ट:
बेरमो में ‘जीरो कोल लीकेज’ का दावा, फिर भी जारी कोयले का अवैध कारोबार..
बेरमो कोयलांचल में अवैध कोयला खनन, भंडारण और परिवहन के खिलाफ सीआईएसएफ तथा सीसीएल की कार्रवाई लगातार जारी है। छापेमारी में बड़ी मात्रा में कोयला, मोटरसाइकिल और अन्य संसाधन जब्त किए जा रहे हैं। बावजूद इसके अवैध कोयले का कारोबार पूरी तरह बंद होता दिखाई नहीं दे रहा।कार्रवाई में कभी बड़ी मात्रा में कोयला बरामद हो रहा है तो कभी दर्जनों वाहन जब्त हो रहे हैं। बेरमो क्षेत्र में सीसीएल के कई महत्वपूर्ण खनन क्षेत्र हैं और यहाँ अवैध कोयला परिवहन का नेटवर्क बेखौफ अपने काम में लगा है। बेरमो के ही फुसरो का 5 नम्बर धौडा और रानीबाग में कई बार सीआईएसएफ के द्वारा छापेमारी की गई,हर बार अवैध कोयला जब्त किया जाता है। फिर भी अवैध कोयला ढ़ुलाई बदस्तूर जारी है।
9 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय ने बताया कि 4–8 जुलाई के बीच सीआईएसएफ ने झारखंड और पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्रों में 428.34 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद किया। इसी अभियान में सीसीएल करगली से 9.25 मीट्रिक टन कोयला और 7 मोटरसाइकिलें जब्त की गईं। कार्रवाई में ड्रोन निगरानी, मानव खुफिया, परिवहन मार्गों की निगरानी, दस्तावेजों की जांच, डिपो व धर्मकांटों की जांच और जीपीएस आधारित दस्तावेजीकरण जैसे उपाय इस्तेमाल किए गए
और 20 जुलाई को गृह मंत्रालय ने बताया कि तीन सप्ताह की कार्रवाई में सीआईएसएफ ने कुल 1,798.725 मीट्रिक टन अवैध कोयला, 84 वाहन और 21 प्रत्यक्ष शिकायत मामले दर्ज किए। सीसीएल के संबंधित क्षेत्रों से 284.715 मीट्रिक टन की बरामदगी भी बताई गई।
इसी साल जुलाई में सीआईएसएफ की कार्रवाई में करगली क्षेत्र से अवैध कोयला और सात मोटरसाइकिलें जब्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद अगस्त में कारो माइंस क्षेत्र में संयुक्त कार्रवाई के दौरान 100 टन से अधिक कथित अवैध कोयला और 50 मोटरसाइकिलें जब्त होने की सूचना भी सामने आई।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है—अगर सुरक्षा बलों की कार्रवाई इतनी प्रभावी है, तो अवैध कारोबार बार-बार नए तरीके से कैसे शुरू हो जाता है?
सिर्फ कोयला जब्त करने से क्या टूटेगा पूरा नेटवर्क?
अवैध कोयले के कारोबार का सही नेटवर्क केवल उसी व्यक्ति तक नहीं होता जो खदान या डंप से कोयला उठाकर मोटरसाइकिल अथवा अन्य वाहन से ले जाता है। दरअसल यह नेटवर्क कोयले के श्रोत से आरंभ होकर अवैध उत्खनन,संग्रहण, स्थानीय परिवहन ,भंडारण,खरीदार व अंतिम बाजार तक होता है। यदि यह कारवाई केवल कोयला और वाहन जब्त करने तक सीमित रह जाती है और कोयले के स्रोत, आर्थिक लाभार्थियों, भंडारण स्थलों, परिवहन नेटवर्क और अंतिम खरीदारों तक जांच नहीं पहुंचती है तो इसका नेटवर्क ध्वस्त करना असंभव है। अवैध कोयले के परिवहन में यदि 50 मोटरसाइकिलें एक साथ पकड़ी जाती हैं, तो बेशक यह संगठित अपराध के तहत चलाए जा रहे परिवहन व्यवस्था का संकेत है और निश्चित रुप से 50 मोटरसाइकिलों की जब्ती की रिपोर्ट इसी सवाल को गंभीर बनाती है।
इतना ही नहीं,विभिन्न साधनों से अवैध कोयला ढुलाई करने वालों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ है कि घनी आबादी वाले इलाकों से भी बिना रोक-टोक के इनकी वाहनें रफ्तार भर रही है। पेटरवार थाना क्षेत्र में खेतको के रास्ते दांतू मेन रोड होते हुए किसी भी समय कोयला लदे हुए मोटरसाइकिलों का झुंड देखा जा सकता है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र के जारंगडीह काली मंदिर के आसपास तीन से चार जगहों पर रात के अंधेरे में पिकअप वैन पर कोयला लाद कर विभिन्न स्थानों पर भेजा जा रहा। इतना ही नहीं,जारंगडीह मांझी टोला से भी रात के अंधेरे में अवैध कोयले का खेल जारी है। अगर इस मामले पर बोकारो जिला प्रशासन गहनता से जांच अभियान चलाए तो पेटरवार थाना क्षेत्र के खेतको में चल रहे कोयले की अवैध मंडी का भी खुलासा हो सकता है। निस्संदेह कोयले के इस काले खेल में स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है।
बहरहाल,बेरमो कोयलांचल में धड़ल्ले से जारी अवैध कोयले के इस काले खेल में सवाल यह नहीं कि सीआईएसएफ द्वारा कार्रवाई की जा रही है या नहीं बल्कि सवाल यह है कि कार्रवाई के बावजूद अवैध कोयला बार-बार उसी इलाके से कैसे निकल रहा है? क्या जांच सिर्फ कोयला ढोने वाले तक ही सीमित है या उस नेटवर्क तक भी है जो इस पूरे कारोबार को संगठित रूप से संचालित करता है?
इस मामले में बहुत सारे पेड्लर के नाम सामने आते हैं लेकिन इसके मुख्य आका तक
पहूँचना स्थानीय प्रशासन के बूते के बाहर है।
अब प्रश्न है कि जब सरकार ने जीरो कोल लीकेज का लक्ष्य तय कर दिया है,सीआईएसएफ को एमएमडीआर एक्ट के तहत अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं और तकनीकी निगरानी तक बढ़ाई गई है, तब बेरमो में अवैध कोयले की पुनरावृत्ति क्यों जारी है?
साथ ही, जिस नेटवर्क के माध्यम से अवैध कोयला खदान से बाजार तक पहुंचाया जाता है,आखिर कौन है उस नेटवर्क का मास्टरमाइंड ?






