वर्णों पर साधा निशाना
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
सारठ (देवघर) : पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को प्रखंड क्षेत्र के पलमा पंचायत के कटहरा मैदान में झारखंड सामाजिक न्याय मंच के बैनर तले सामूहिक बैठक करके मंडल दिवस मनाया गया। वहीं आयोजित कार्यक्रम ने पूर्व सांसद सूरज मंडल, जिला परिषद सदस्या आशा देवी, झामुमो नेता मनोज सुभद्रा यादव, चांदों मंडल, सुबोध महतो, हरिकिशोर कोल, जगन्नाथ पंडित, सिराज अंसारी, मुखिया जगन्नाथ रवानी, नंदकिशोर तुरी, सदानंद पोद्दार, युगल यादव, अनिल कोल समेत सैकड़ों की संख्या में पिछड़ा, दलित, आदिवासी व अल्पसंख्यक समुदाय के लोग मौजूद थे। वहीं अपने संबोधन में पूर्व सांसद व अन्य वक्ताओं ने सारठ विधानसभा क्षेत्र में आबादी के आधार पर भागीदारी नहीं मिलने पर रोष जताते हुए बदलाव लाने पर जोर दिया। कहा कि देश को आजादी मिले आठ दशक होने को है, वहीं झारखंड के अलग राज्य बने भी 26 वर्ष होने वाले हैं। लेकिन फिर भी सारठ विधानसभा क्षेत्र के आम लोगों को अपने अधिकार, स्वाभिमान, समानता, सम्मान व सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए विवश होना पड़ रहा है। कई वक्ताओं ने कार्यक्रम में जुटे लोगों से आह्वान करते कहा कि, अब हमें अपने आने वाले पीढ़ी को लेकर चिंतन मंथन करना होगा। वहीं पिछड़ा, आदिवासी, दलित व अल्पसंख्यक समाज को जागरूक भी करना होगा और सारठ में बदलाव का बयार भी लाना होगा। वहीं हम सभी
एससी, एसटी, पिछड़ा व अल्पसंख्यक समुदायको एकजुट भी होना होगा। जिक्र किया कि पूरे देश में जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी के नारे बुलंद हो रहे हैं। लेकिन फिर भी सारठ विधानसभा क्षेत्र के लोग अनभिज्ञ बने हुए हैं। वहीं स्वर्ण समुदाय पर सीधा प्रहार करते कई वक्ताओं ने पिछड़े समुदाय को संविधान से मिले
आरक्षण को ख़त्म करने का षड्यंत्र रचने का भी आरोप लगाया। दो टूक कहा कि
27 फीसदी आरक्षण सिर्फ कागजों में दिया है, जमीन पर उसका लाभ ओबीसी वर्ग को नहीं मिल रही है। वहीं मंडल दिवस के उद्देश्यों पर कहा कि वंचितों को न्याय दिलाना ही मक़सद है। यदि आम आदमी को उनका वाजिब हक नहीं मिलेगा तो हक के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए भी तैयार होना होगा।
सामंती समुदाय पर पिछड़ा वर्ग के वाजिब हक को मारने का आरोप लगाते हुए कई वक्ताओं ने कहा कि अब हमें अपने आने वाली पीढ़ी को ध्यान में रखते सारठ को आजाद कराने की जरूरत है। वहीं वर्तमान विधायक चुन्ना सिंह का बिना नाम लिए कहा कि वर्ष 1990 में जब
सारठ डाकबंगला में झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के नेतृत्व में एक आम सभा की गई थी।, वर्तमान झामुमो विधायक काला झंडा दिखा रहे थे। लेकिन आज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर कुर्सी हथियाके बैठे हैं और क्षेत्र के पिछड़ा, दलित आदिवासी व अल्पसंख्यक समुदाय का हालत जैसा का तैसा बना हुआ है। बताया कि जिले का एकमात्र औद्योगिक प्रतिष्ठान
चितरा कोलियरी है, जिसमें आदिवासी, पिछड़ा, दलित व अल्पसंख्यक का जमीन गया है। लेकिन कोलियरी का लाभ यहां के 10 फीसदी सामंती समुदाय को मिल रहा है। वहीं सूरज मंडल ने झारखंड में लुट खसोट का साम्राज्य होने का दावा करते कहा कि यही दिन देखने के लिए झारखंड नहीं बना था। इसलिए
अब हमें अपने अधिकार के लिए करो या मरो की लड़ाई लड़ना होगा। अन्यथा आने वाली पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उल्लेख किया कि देश में मेरी आबादी 70 फीसदी है, लेकिन साम्राज्य सवर्णो का है। उदाहरण देकर बताया कि
मंदिरों में 100 फीसदी, न्यायपालिका ने 99 फीसदी,
मीडिया में 80 फीसदी,
विधायिका में 50 फीसदी और
कार्यपालिका में 50 फीसदी हड़प लिया गया है। वहीं
अन्य क्षेत्रों में भी सवर्णों का एकाधिकार है, जबकि इनकी जनसंख्या 10 फीसदी है।
जिक्र किया कि आज मजदूर का बेटा मजदूर और ऑफिसर का बेटा ऑफिसर, ऐसा अब चलने नहीं दिया जाएगा। कहा कि आज झामुमो विरोधी गद्दी में है और झामुमो के लिए संघर्ष करने वाले लोग आज भी फटेहाल है।





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