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करौं में रानी मंदाकिनी उच्च विद्यालय का छात्रावास 35 साल से बंद, सरकारी उपेक्षा से खंडहर में तब्दील


• गरीब छात्र हो रहे प्रभावित

रांची एक्सप्रेस संवाददाता 

करौं (देवघर) : शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर भवन निर्माण कराती है, लेकिन रखरखाव और उदासीनता के अभाव में वही भवन खंडहर बन जाते हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण करौं प्रखंड मुख्यालय स्थित प्लस टू रानी मंदाकिनी उच्च विद्यालय परिसर में देखने को मिल रहा है। 

यहां लगभग 35 वर्ष पूर्व छात्रों के लिए बनवाया गया छात्रावास आज तक चालू नहीं हो सका और अब पूरी तरह जर्जर होकर गिरने के कगार पर पहुंच गया है।

बताया जाता है कि 1990 के दशक के आसपास इस छात्रावास का निर्माण कराया गया था। उद्देश्य था कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब छात्र-छात्राएं विद्यालय परिसर में ही रहकर पढ़ाई कर सकें। भवन बनकर तैयार भी हो गया, लेकिन उद्घाटन और संचालन की फाइलें सरकारी दफ़्तरों में ही उलझकर रह गईं। किसी अधिकारी ने इसे हैंडओवर लेकर चालू कराने की जहमत नहीं उठाई। जनप्रतिनिधियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

आज स्थिति यह है कि छात्रावास को देखकर लगता ही नहीं कि यह कभी छात्रावास था। भवन की दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें पड़ गई हैं। छत का प्लास्टर उखड़कर गिर रहा है। अधिकांश खिड़कियां और दरवाजे टूट चुके हैं या चोरी हो चुके हैं। फर्श पर झाड़ियां और छोटे-छोटे पेड़ उग आए हैं। परिसर में सांप-बिच्छुओं का बसेरा हो गया है। छात्रावास के चारों ओर गंदगी पसरी हुई है। असामाजिक तत्वों का भी यहां जमावड़ा लगा रहता है।

रानी मंदाकिनी प्लस टू उच्च विद्यालय इस क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी विद्यालय है। यहां वर्ग 1 से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई होती है। यहां करौं प्रखंड के करौं, बुढ़ई, टेटरा, बेलकियारी, रन्हा, सतपहाड़ी सहित सारठ प्रखंड के दर्जनों गांवों जैसे पथरड्डा, बोचबांध, चितरा, ठाड़ी आदि के छात्र पढ़ने आते हैं। कई गांवों से विद्यालय की दूरी 10 से 15 किलोमीटर तक है।

छात्रावास चालू नहीं होने से गरीब परिवार के बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। उन्हें रोज सुबह साइकिल या अन्य साधनों द्वारा लंबी दूरी तय कर स्कूल आना पड़ता है। बरसात और ठंड के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है। कई छात्र समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते तो कई बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। यदि छात्रावास चालू रहता तो कम से कम 50 से 100 बच्चे यहां रहकर आसानी से पढ़ाई कर सकते थे। छात्राओं के लिए भी यह सुरक्षित आवास बन सकता था।

तीन-चार दिन पूर्व विधायक सह मंत्री हफ़ीजुल हसन जब रानी मंदाकिनी उच्च विद्यालय पहुंचे तो उन्होंने भी जर्जर छात्रावास का जायजा लिया। ग्रामीणों और शिक्षकों ने उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। इस पर मंत्री ने कहा कि भवन काफी जर्जर हो चुका है, इसका प्राक्कलन तैयार कर मरम्मत कराई जाएगी, ताकि गरीब-गुरबा के बच्चे यहां रहकर पठन-पाठन कर सकें।

वहीं इस मामले को लेकर प्रखंड प्रमुख सिंपू देवी और उप प्रमुख राजेश कुमार ने भी चिंता जताई है। दोनों ने संयुक्त रूप से सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस छात्रावास की जल्द मरम्मत कराकर इसे चालू किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का पैसा बर्बाद हो रहा है, जबकि जरूरत है कि इसका उपयोग छात्र हित में हो।

स्थानीय अभिभावकों का भी कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो मामूली मरम्मत के बाद इसे फिर से उपयोग योग्य बनाया जा सकता है। इसके चालू होने से न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि ड्रॉपआउट दर में भी कमी आएगी। लोगों ने उपायुक्त देवघर से भी इस ओर ध्यान देने की अपील की है।