छोटी सी प्यारी सी नन्हीं सी, आई कोई परी; कांवरिया पथ की सबसे मासूम कांवरिया
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
देवघर : कांवरिया पथ पर जहां लाखों कदम 'बोल बम' कहते हुए बाबा की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं इन कदमों के बीच एक सबसे छोटा, सबसे मासूम कदम भी है।
तस्वीर में एक हरे रंग के ठेले पर लेटी हुई यह नन्ही सी गुड़िया सिर्फ एक बच्ची नहीं है, ये अपने पिता की आस्था, उसकी मजबूरी और उसके प्यार की सबसे बड़ी गवाही है।
पिता के कंधे पर कांवर नहीं, बल्कि उसकी पूरी दुनियां है। शायद घर पर इसे छोड़ने वाला कोई नहीं, शायद माँ भी साथ है कहीं भीड़ में, या शायद पिता ने सोचा होगा कि बेटी को भी बाबा बैद्यनाथ का आशीर्वाद दिला दूं। तपती धूप, धूल भरी सड़क, और पैरों में छाले लेकर चलने वाले इस पिता ने अपनी बच्ची के लिए इस ठेले को ही घर बना दिया है। गैस, बर्तन, कपड़े और बीच में फूल सी बेटी।
लोग उसे देखकर पैसे डाल रहे हैं, कोई आशीर्वाद दे रहा है, कोई मुस्कुरा रहा है। पर वो नन्ही परी कुछ नहीं समझती, वो तो बस अपने पिता की आंखों में भरोसा देखकर निश्चिंत सोई है। उसे नहीं पता कि ये 105 किलोमीटर का कठिन रास्ता क्या होता है, उसे बस पता है कि जहाँ पिता है, वहीं सुरक्षित है।
भक्ति सिर्फ मंदिर में जल चढ़ाना नहीं है, भक्ति वो जिम्मेदारी भी है जो एक पिता अपनी नन्ही सी जान को सीने से लगाकर, कांवरियों की भीड़ में भी पूरी कर रहा है।






