गिरिजा कुमार माथुर व प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयन्ती मनी
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
मधुपुर बाजार (देवघर) : शहर कै भेड़वा स्थित राहुल अध्ययन केन्द्र में प्रसिद्ध साहित्यकार गिरिजा कुमार माथुर व प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयन्ती मनायी गयी.
मौके पर उपस्थित लोगों ने दोनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये.
मौके पर जलेस के प्रांतीय सह सचिव, धनंजय प्रसाद ने कहा कि गिरिजा कुमार माथुर ने हम होंगे कामयाब, जैसे अत्यंत लोकप्रिय गीत का काव्यानुवाद कर काफी ख्याति पायी और उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से नवाजा गया. वैसे उनकी पहली काव्य संग्रह - नाश और निर्माण, 1946 में प्रकाशित हुआ. वो आकाश वाणी उत्तर प्रदेश के महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुते थे. उन्होंने कहा कि हरिशंकर परसाई ख्याति प्राप्त व्यंग्यकार थे, उन्हें हिन्दी साहित्य में व्यंग्य को एक विधा के रूप में दर्जा दिलाया. परसाई जी का व्यंग्य हर तरफ चोट करता है. उन्होंने सामाजिक, राजनीतिक , धार्मिक , प्रशासनिक हर व्यवस्था पर व्यंग्य किया. उनकी भाषा सरल, सहज व सर्वग्राही पर उनका बिम्ब सृजन असाधारण, सामाजिक पाखंड और रुढ़िवादी जीवन मूल्यों की खिल्ली उड़ाते हुए उन्होंने विवेक व तर्कसम्मत दृष्टि को साकारात्मक रुप में प्रस्तुत किया था.
अपने प्रखर व्यंग्य के वजह से उन्हें कट्टरपंथी द्वारा हिंसक हमले भी झेलना पड़ा , बावजूद इसके उन्होंने व्यंग्य लिखना नहीं छोड़ा. मौजूदा समय में यदि वो होते तो अपने तीखे व्यंग्य से व्यवस्था व पाखंड विरोध चोट किये वगैर नहीं रहते, भले ही क्यूं न उन्हें दिमागी नक्सली कह प्रताड़ित होना होता. वो हमेशा ग़लत व अन्याय से टकराने की हौसला रखते थे. इसके अलावे उन्होंने दो उपन्यास भी लिखे थे. भला ऐसे विभूतियों को कैसे बिसराया जा सकता है. उन्हें याद करना लाजिमी है. अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये.






