गुरु तेगबहादुर के त्याग व बलिदान हिन्दुस्तान को सरताज बनाया - अविनाश देव
मेदिनीनगर - पूर्वी प्रक्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय,गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के साथ मिल कर सिखों के नवें गुरु हिंद के चादर गुरु तेग बहादुर सिंह जी के 350 वें शहीदी दिवस पर स्थानीय गुरु तेग बहादुर मेमोरियल हॉल में एक कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। मुख्य अतिथि अरुणा शंकर मेयर नगरनिगम मेदिनीनगर के साथ फीता काट कर व सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर शहादत कार्यक्रम को प्रारंभ किए। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष पुष्पगुच्छ अंगवस्त्र मोमेंटो और शौर्य के प्रतीक तलवार देकर स्वागत किए। अपने संबोधन में गुरु तेग बहादुर सिंह जी के शौर्य शहादत त्याग बलिदान पर प्रकाश डालते हमने कहा गुरु तेग बहादुर धर्मनिरपेक्षता के बड़े मिशाल थे कि सिख होकर सनातन हिन्दू धर्म के हिफाजत अपनी जान देकर किए। मुगलों का राज था औरंगजेब दिल्ली सल्तनत के सबसे बड़ा सुल्तान था उसकी क्रूरता जग जाहिर है। सबसे बड़ा राज्य विस्तार,पचास साल राज किया किंतु हिन्दू मंदिर को ध्वस्त,जजिया कर,हिन्दू त्योहारों पर रोक और जबरन धर्म परिवर्तन जी का जंजाल बन गया। सिख जाट मराठा सब मिल कर लड़े और कश्मीरी पंडितों को बा जबरदस्ती इस्लाम कबूलवाने के खिलाफ कश्मीरियों ने गुरु तेग बहादुर से मदद मांगे इन्होंने हामी भरी और अंततः अपनी जान देकर धर्म की रक्षा किए।औरंगजेब दिल्ली बुलवाया और यहीं तेग बहादुर जी को सर कलम कर दिया। आज ईस्टर्न जोन कल्चर सेंटर भारत सरकार सांस्कृतिक मंत्रालय गुरुद्वारा सभा के साथ मिल कर उनके शहादत को याद कर रहा है। उन्होंने तलवार से नहीं त्याग से पूरी दुनिया को सिखाया कि इंसानियत और धर्म की आजादी सबसे ऊपर है। हम सब को इनके शहादत पर संकल्प लेने कि जरूरत है कि मातृभूमि की रक्षा में प्राण भी तुक्ष है।
रंगकर्मी सैकत दा को शुक्रिया की पूर्वोत्तर भारत में होने वाला कार्यक्रम को नीलांबर पीताम्बर मेदिनीराय के धरती पर लाकर गुरु तेग बहुदुर जी और नजदीक से जानने का मौका दिए। उप मेयर मनोज सिंह जी,संपादक शिवशंकर प्रसाद, व्यवसायी डिम्पल जी, डॉक्टर राजीव नयन जी,सहित बहुतायत गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। विनम्र श्रद्धांजलि।





