भाई-बहन के अटूट प्रेम और प्रकृति से जुड़ी परंपरा में रचा-बसा करमा पर्व
राँची एक्सप्रेस संवाददाता बेंगाबाद
बेंगाबाद प्रखंड क्षेत्र में झारखंडी संस्कृति और परंपरा के अनुरूप करमा पर्व हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। प्रकृति और भाई-बहन के अटूट प्रेम से जुड़े इस पर्व को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पर्व की तैयारियों के दौरान गांव की गलियों से लेकर तालाब-पोखर और बाग-बगीचों तक पारंपरिक गीतों की गूंज सुनाई दे रही है।
करमा पर्व के मौके पर बहनों द्वारा अपने भाइयों के साथ फूल तोड़ने और करमा की डाली लाने की अनोखी परंपरा आज भी क्षेत्र में कायम है। प्रखंड के विभिन्न गांवों में बहनें अपने भाइयों के साथ तालाब, पोखर एवं बाग-बगीचों से तरह-तरह के फूल तोड़कर एकत्र करती हैं। इसके बाद फूलों से सजी डाली लेकर महिलाएं सामूहिक रूप से पारंपरिक गीत गाते हुए घर पहुंचती हैं। इसके बाद भाई-बहन मिलकर जंगल से करमा पेड़ की डाली लाते हैं। इस दौरान रास्ते भर महिलाएं करमा से जुड़े पारंपरिक गीत गाती हुई घर पहुंचती हैं। घर में करमा की डाली स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं रातभर जागरण कर करमा देवता की पूजा करती हैं तथा अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं। करमा पर्व की पारंपरिक रस्मों और लोकगीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिभाव में डूबा हुआ है। ग्रामीण इलाकों में इस पर्व के माध्यम से झारखंडी संस्कृति, प्रकृति प्रेम और भाई-बहन के स्नेह की परंपरा आज भी जीवंत नजर आ रही है।






