श्रावण में शिव पर जलार्पण अत्यंत फलदायी, एक बूंद गंगाजल भी करता है कल्याण: पं. मुकुंद पुरोहितवार
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
बैद्यनाथधाम (देवघर) : पवित्र श्रावण मास में बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण का विशेष महत्व क्यों है? इस संबंध में बैद्यनाथधाम के तीर्थ पुरोहित एवं ज्योतिषाचार्य पंडित मुकुंद पुरोहितवार ने कहा कि श्रावण माह में किया गया शिव पूजन और जलार्पण वर्ष भर के अन्य महीनों की तुलना में अधिक फलदायी होता है।
पं. पुरोहितवार ने बताया कि सावन, भादो, अश्विन और कार्तिक के चार माह चातुर्मास कहलाते हैं। इस अवधि में केवल देवी-देवताओं की आराधना की जाती है। विवाह, उपनयन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते। इसी कारण इस पवित्र समय में भगवान शिव पर जल चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से शुरू होकर 105 किमी की पैदल यात्रा कर आने वाले कांवरिया जब एक बूंद गंगाजल भी बाबा पर अर्पित कर देते हैं तो भक्त का कल्याण निश्चित है। आज यह कांवर यात्रा गंगोत्री और गोमुख से भी की जा रही है। कांवर को स्वयं भोलेनाथ का स्वरूप माना जाता है।
बैद्यनाथ में शिव-शक्ति का संगम:-
पं. पुरोहितवार ने बताया कि देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में नवम ज्योतिर्लिंग हैं। सभी ज्योतिर्लिंगों में शिव विराजमान हैं, लेकिन यहां "सदा वसंतम गिरिजा समेतम" के अनुसार माता गिरिजा के साथ बाबा भोलेनाथ विराजमान हैं। इसी कारण यहां गठबंधन की परंपरा भी है और इसे शिव-शक्ति का मिलन स्थल कहा जाता है।
श्रावण में क्या है खास:-
उन्होंने कहा कि श्रावण में सोमवारी व्रत, त्रिदल बेलपत्र और गंगाजल का विशेष महत्व है। इस माह में जलार्पण करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है - चाहे वह पढ़ाई, नौकरी, विवाह या संतान प्राप्ति का क्षेत्र हो।
पं. पुरोहितवार ने कहा यही कारण है कि यहां हर साल भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। जहां भक्तों की आस्था पूरी होती है वहीं भीड़ लगती है। बाबा बैद्यनाथ पर श्रद्धा रखने वाले भक्तों को नौकरी मिल रही है, विवाह हो रहे हैं और पुत्र रत्न की प्राप्ति हो रही है।
श्रावण माह में लाखों कांवरिया बाबा नगरी पहुंचकर अपनी आस्था की डोर बाबा से जोड़ते हैं।


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