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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आचार्यकुल–अरका जैन विश्वविद्यालय के संयुक्त मंच से ‘आदर्श शिक्षक एवं आचार्य परंपरा’ का संदेश


आचार्यकुल–अरका जैन विश्वविद्यालय के संयुक्त मंच से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ‘आदर्श शिक्षक एवं आचार्य परंपरा’ का संदेश, डॉ. वासुदेव बोले— श्रीकृष्ण अर्थात् हर परिस्थिति में जागृत रहना


रांची, 4 सितंबर 2026। 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आचार्यकुल झारखंड एवं अरका जैन विश्वविद्यालय, झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में अरका जैन विश्वविद्यालय के सिटी ऑफिस, लालपुर, रांची में एन आइडल टीचर इज ए फॉलोअर ऑफ द आचार्यपरंपरा  विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन, प्रेम, शिक्षा, कर्तव्य, जागरूकता, मानवीय मूल्यों तथा भारतीय आचार्य परंपरा को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए शिक्षकों की भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, श्रीकृष्ण आरती, भजन, हनुमान चालीसा एवं शांति पाठ के साथ हुआ। आचार्यकुल झारखंड के उपाध्यक्ष डॉ. वासुदेव प्रसाद एवं उपस्थित सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर भगवान श्रीकृष्ण की आरती एवं पुष्प अर्पित कर वंदना की।
अपने संबोधन में डॉ. वासुदेव प्रसाद ने कहा कि श्रीकृष्ण का अर्थ ही हर परिस्थिति में जागृत रहना है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में सजगता, विवेक, धैर्य और कर्तव्य का परिचय दिया। परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण रही हों, उन्होंने जागृत चेतना के साथ उचित निर्णय लेकर धर्म, प्रेम और लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि एक आदर्श शिक्षक के लिए भी अपने विद्यार्थियों, समाज और बदलती परिस्थितियों के प्रति सदैव जागृत एवं संवेदनशील रहना आवश्यक है।
कार्यक्रम में रांची के पुरुषोत्तम कुमार ने आचार्यकुल का सामूहिक गीत प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद आचार्यकुल झारखंड के महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, ज्ञान, कर्तव्य, समर्पण और लोकमंगल का संदेश देता है। विषय की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि आदर्श शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि अपने आचरण से विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक होता है।
अरका जैन विश्वविद्यालय के डॉ. प्रभात भास्कर एवं दीनबंधु सिंह ने स्वागत उद्बोधन करते हुए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश प्रेम, सद्भाव, सहयोग और मानवता को जोड़ने वाला है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, संस्कारवान एवं जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है।
इस अवसर पर आचार्यकुल झारखंड की उपाध्यक्ष डॉ. चित्रा शर्मा ने शिक्षक के व्यक्तित्व में प्रेम, संवेदना एवं मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। डॉ. कमल बॉस सहित अन्य शिक्षाविदों ने भी अपने उद्गार व्यक्त करते हुए श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन और भारतीय आचार्य परंपरा से प्रेरणा लेने पर बल दिया।
कार्यक्रम में डॉ. संध्या, डॉ. उपेंद्र, डॉ. प्रियंका, डॉ. चित्रा शर्मा, डॉ. पुरुषोत्तम, निरंजन, शुभम चौधरी, डॉ. प्रभात भास्कर, धर्मेंद्र कुमार साहू, दीनबंधु सिंह, नवनीत, इकरामुल, सीमा, डॉ. मीना बंधन, डॉ. सिंपी, डॉ. अमित, आशीष झा, डॉ. शीतल, मनोज कुमार श्रीवास्तव, सोनल थेपरा वर्मा, कल्पना कौशल, डॉ. रंजीत कुमार, रंजन कुमार, आभा तिवारी, डॉ. वासुदेव प्रसाद एवं डॉ. कमल बॉस सहित अनेक शिक्षाविद उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, शिक्षा, कर्तव्य, जागरूकता, नेतृत्व और मानवता का अद्भुत समन्वय है। आज के समय में शिक्षक यदि श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेकर विद्यार्थियों में प्रेम, अनुशासन, कर्तव्यबोध, सहिष्णुता, जागरूकता और सामाजिक समरसता के संस्कार विकसित करें, तो शिक्षा वास्तविक अर्थों में राष्ट्र निर्माण का माध्यम बन सकती है। वक्ताओं ने मेल-मिलाप, आपसी सद्भाव और समाज को जोड़ने वाली शिक्षा को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम में रांची की कवयित्रियों, कवियों, लेखकों, शिक्षक प्रशिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने भी आज के विषय पर अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने श्रीकृष्ण के प्रेम, शिक्षा एवं आचार्य परंपरा को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर सभी आगत अतिथियों एवं अरका जैन विश्वविद्यालय के अधिकारियों को अंगवस्त्रम एवं डायरी देकर सम्मानित किया गया। आचार्यकुल झारखंड के उपाध्यक्ष द्वय डॉ. वासुदेव प्रसाद एवं डॉ. चित्रा शर्मा ने संयुक्त रूप से सभी आगत अतिथि को शिक्षक सम्मान एवं श्रीकृष्ण सम्मान से प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का परिचय डॉ. ओम प्रकाश ने कराया। उन्होंने बताया कि रांची विश्वविद्यालय, ऊषा मार्टिन विश्वविद्यालय, इकफाई विश्वविद्यालय, विद्या भारती विद्यालय, आचार्यकुलम विद्यालय, साहित्यिक मंच एवं डाइट रांची सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं साहित्यिक संस्थानों से कुल लगभग 50 शिक्षाविदों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में अरका जैन विश्वविद्यालय के शुभम चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षाविदों, शिक्षक प्रशिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ।