मेदिनीनगर। शिक्षक एम जे अजहर द्वारा अपने पिता की स्मृति में स्थापित अदबी* संसार* के तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस की 79वीं वर्षगांठ के अवसर पर संत मरियम आवासीय विद्यालय परिसर में कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत मरियम आवासीय विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव थे। कार्यक्रम की शुरुआत में अदबी* संसार* के अध्यक्ष एम जे अजहर साहब ने अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर मुख्य अतिथि अविनाश देव का स्वागत किया।
कवि सम्मेलन सह मुशायरा का संचालन सुबह की धूप पत्रिका के संपादक शिवशंकर प्रसाद ने किया। कार्यक्रम में पलामू के जाने-माने कवि एवं शायरों का जमघट लगा। मकबूल मंजर, कयूम रूमानी, चल चल परदेसी गीत के रचयिता एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रभात जी, रविशंकर पांडेय सहित जिले के अनेक प्रगतिशील कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। शीला श्रीवास्तव, रीना प्रेम दुबे समेत करीब 40 कवियों एवं शायरों ने कविता और मुशायरे के माध्यम से श्रोताओं को साहित्य की विविध रंगों से रूबरू कराया।
संत मरियम आवासीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और रुचि के साथ कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आनंद लिया तथा साहित्यिक प्रस्तुतियों का लाभ उठाया।
मुख्य अतिथि अविनाश देव ने कहा कि पलामू में कवि सम्मेलन और मुशायरे की समृद्ध परंपरा रही है। पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय में तीन ऐसे पुस्तकालय हैं, जो सौ वर्ष से भी अधिक पुराने हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज से एक सदी पहले भी इस क्षेत्र में साहित्य, कविता और मुशायरे की मजबूत परंपरा रही होगी।
उन्होंने कहा कि जब देश की हुकूमत लोकतांत्रिक मूल्यों से हटकर काम करने लगती है और लोकतंत्र खतरे में पड़ता है, तब साहित्यकारों और लेखकों का दायित्व और बढ़ जाता है। साहित्यकार समाज को सही राह दिखाने का काम करते हैं। साहित्य समाज का आईना है और समय-समय पर ऐसे साहित्यिक आयोजनों का होना समाज के लिए बेहद जरूरी है।
अविनाश देव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन सह मुशायरा आयोजित करने के लिए एम जे अजहर साहब को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति, सामाजिक चेतना, प्रेम, भाईचारे और प्रगतिशील विचारों का संदेश दिया। साहित्यिक प्रस्तुतियों से विद्यालय परिसर देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।






