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दुमका के शिकारीपाड़ा में कोल टेस्टिंग पर घमासान, फर्जी केस वापसी और रायमनी सोरेन की रिहाई को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू


रांची एक्सप्रेस संवाददाता 

दुमका : जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड में चल रहे कोल टेस्टिंग के विरोध ने अब बड़ा रूप ले लिया है। बांकीजोर, बांसपहाड़ी और हीरापुर पंचायत के रैयत और किसान अपनी जमीन बचाने के लिए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। मंगलवार को कल्याणपुर मैदान के पास भाकपा माले के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण धरना शुरू किया।

ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 9-10 महीनों से बिना ग्रामसभा की अनुमति के और पेसा कानून का उल्लंघन कर क्षेत्र में जबरन कोल टेस्टिंग के लिए बोरिंग का काम कराया जा रहा था। धरना स्थल पर "कंपनी वापस जाओ" और "पेसा कानून लागू करो" के नारे गूंज रहे हैं। ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि वे दोबारा अपनी जमीन पर बोरिंग नहीं होने देंगे।

धरने को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला संयोजक भुण्डा बास्की, पलटन हांसदा और सुभाषचंद्र मंडल ने कहा कि बोरिंग मशीनों को हटाया जाना आंदोलन की पहली जीत है, लेकिन लड़ाई अभी बाकी है। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बोरिंग का विरोध करने वाले निर्दोष युवाओं और महिलाओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

आंदोलनकारियों ने दो मुख्य मांगें रखी हैं। पहली, सभी फर्जी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं और दूसरी, पिछले तीन महीने से जेल में बंद रायमनी सोरेन को जल्द रिहा किया जाए। नेताओं ने कहा कि रायमनी के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं, ऐसे में उन्हें अविलंब न्याय मिलना चाहिए।

आदिवासी समाज और आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन और उग्र होगा और सड़क से सदन तक जाएगा। धरने में सुरेश मुर्मू, रामेश्वर टुडू, सन्यासी हेंब्रम, जाम्बड़ू बास्की समेत सैकड़ों ग्रामीण डटे हुए हैं।