जेएमबीएल सेस और प्रस्तावित एमएम डीआर संशोधन के खिलाफ राजद जिलाध्यक्ष इरफान आलम ने जताई चिंता
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
गिरिडीह :खनिज वहन भूमि उपकर जेएमबीएल सेस एवं प्रस्तावित एमएम डीआर संशोधन विधेयक 2026 को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के गिरिडीह जिलाध्यक्ष इरफान आलम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन पर गंभीर चिंता जताई है उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजस्व से जुड़ा नहीं बल्कि झारखंड के वित्तीय एवं विधायी अधिकारों तथा राज्य की स्वायत्तता से भी सीधे जुड़ा हुआ है इरफान आलम ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एमएमडीआर एक्ट 1957 में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से खनिज अधिकारों अथवा खनिजयुक्त भूमि पर राज्य सरकारों द्वारा कर, उपकर एवं अन्य लेवी लगाने के अधिकार को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने खनिजयुक्त भूमि को भूमि की श्रेणी में मानते हुए ऐसी भूमि पर राज्य सरकारों के कर एवं उपकर लगाने के अधिकार को मान्यता दी थी इसके बाद झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस अधिनियम 2024 पारित किया उन्होंने कहा कि झारखंड देश को कोयला लौह अयस्क समेत कई महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध कराता है लेकिन खनन गतिविधियों का सबसे अधिक प्रभाव स्थानीय लोगों और खनन प्रभावित क्षेत्रों पर पड़ता है विस्थापन भूमि क्षरण पर्यावरणीय नुकसान जल एवं वायु प्रदूषण तथा आधारभूत संरचनाओं पर बढ़ता दबाव इसके प्रमुख उदाहरण हैं ऐसे में खनिज संपदा से प्राप्त होने वाले राजस्व का उचित हिस्सा राज्य की जनता और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च होना चाहिए प्रेस वार्ता में उपलब्ध दस्तावेजों के हवाले से बताया गया कि जेएमबीएल सेस से राज्य को वर्ष 2024-25 में 1,379 करोड़ रुपये वर्ष 2025-26 में 7,488 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026-27 में अनुमानित 13,215 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होने की बात सामने आई है इरफान आलम ने आशंका जताई कि यदि जेएमबीएल सेस को समाप्त या सीमित किया जाता है तो झारखंड को प्रतिवर्ष करीब 13 हजार करोड़ रुपये तक के संभावित राजस्व से वंचित होना पड़ सकता है इसका असर सामाजिक सुरक्षा महिला सशक्तीकरण, शिक्षा स्वास्थ्य ग्रामीण विकास और खनन प्रभावित क्षेत्रों की योजनाओं पर पड़ने की आशंका है राजद जिलाध्यक्षइरफ़ान आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराते हुए आंदोलन की बात कही गई है ऐसे में जनता को प्रस्तावित संशोधन के संभावित प्रभावों से अवगत कराना और झारखंड के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाना जरूरी है उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि खनिज उत्पादक राज्यों से पर्याप्त परामर्श किए बिना ऐसे महत्वपूर्ण कानूनों में बदलाव नहीं किया जाए राज्यों के वित्तीय एवं विधायी अधिकारों तथा संघीय व्यवस्था की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए इरफान आलम ने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक उपकर या राजस्व की नहीं बल्कि झारखंड के विकास खनन प्रभावित परिवारों स्थानीय समुदायों और राज्य के दीर्घकालिक हितों की लड़ाई है झारखंड की खनिज संपदा से होने वाले लाभ में यहां की जनता और राज्य के विकास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल झारखंड के वित्तीय एवं विधायी अधिकारों की रक्षा तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों के न्यायसंगत विकास के लिए अपनी आवाज मजबूती से उठाता रहेगा






