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हिन्दी साहित्य भारती द्वारा कवि गोष्ठी का किया गया आयोजन


पलामू : खण्डकाव्य कण्वाश्रम के रचयिता बिंदु माधव शर्मा की 104 वीं जयंती पर साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य भारती की पलामू जिला इकाई द्वारा बेलवाटिका, मेदिनीनगर स्थित सेसा कार्यालय के सभागार में  कवि राकेश कुमार के संयोजन में एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रेम भसीन ने की जबकि संचालन कवि अनुज कुमार पाठक ने किया।उपस्थित कवियों ने  माँ सरस्वती एवं  बिंदु माधव शर्मा को पुष्पांजलि अर्पित कर  विभिन्न विषयों पर मनमोहक कविताओं को प्रस्तुत किया।अध्यक्षता कर रहे प्रेम भसीन ने कहा कि लद्दाख़ के फूलों की घाटी की तरह पलामू के कवियों की रंगबिरंगी कविताओं ने मन को मोह लिया।मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित गणेश लाल अग्रवाल महाविद्यालय की प्राचार्या जसबीर बग्गा ने कहा कि पलामू की सृजनधर्मिता का कोई जोड़ नहीं।कवि उमेश कुमार पाठक रेणु ने कहा कि बिंदु माधव शर्मा पलामू के जानकी वल्लभ शास्त्री थे। परशुराम तिवारी ने कहा कि पण्डित बिंदु माधव शर्मा ने अपने खण्डकाव्य कण्वाश्रम में जो प्रश्न उठाए उसका समाधान उनके पोते कवि राकेश कुमार ने अपनी पुस्तक 'कण्वाश्रम के फूल' में बताया। 

गोष्ठी में कवि हरिवंश प्रभात ने बरसात पर गीत प्रस्तुत कर सबका मन मोहा
प्यासा पनघट बाट जोहता, और उसे मत तरसाना। 
ओ आषाढ के पहले बादल, झूम- झूमकर बरसाना।

कवि रविशंकर पांडेय ने ग़ज़ल से वाहवाही लूटी
न नफ़रत तलाश कर न प्यार तलाश कर।
दुनिया में जो तुम्हारा वो किरदार तलाश कर।।

कवि सत्येंद्र चौबे सुमन के भक्ति गीत से सब झूम उठेवंशीधारी पे मेरी नजर जो पड़ी  पड़ गई जब नजर तो पड़ी रह गई।
सांवरे श्याम गोरी है मां राधिका दिव्य ऐसी घड़ी एक घड़ी रह गई।।

कवि रमेश कुमार सिंह ने 
देख लिए जब राम सिया फिर चाह रही अब और नहीं है।
या सुखसार समान कहां मिलना सब हाल सेकाल यहीं है।

अनुज कुमार पाठक ने
मिला जो मान जीवन में,उसे मिलकर बढाते हैं,
खिले जो फूल बागों मे, उसी से पथ सजाते हैं।।

कवि राम प्रवेश पण्डित ने   
माधव  के  चरणों  में   इक  फूल चढ़ाना है।
बिंदु से  सिंधु   बन  इतिहास  गढ़ाना है।
कण्वाश्रम की महिमा,अरु लेखन की गरिमा,
अब  इनके  भावों  को   पढ़ना व पढ़ाना है।।

अनुपमा तिवारी ने
बेटियां सुरक्षित हों घर समाज में,
यह चलन हो देश के शासन रिवाज में।

रीना प्रेम दुबे ने 
लाख था पतझड़ भरा पर यादों को मधुमास गाया
गीत गजलें जो भी गाया मैंने बस अहसास गाया।

शायर अमीन रहबर ने
उसका, तुम्हारा और हमारा कभी-कभी। 
 रहता है गर्दिशों में सितारा कभी-कभी।
 
शायर एम जे अज़हर ने
ख़ुदकुशी के हैं ख़यालात उन्हें टाले रखिए 
ज़िंदगी रब की  अमानत है  संभाले रखिए
ग़ज़ल प्रस्तुत की। 

इनके साथ-साथ आचार्य धनन्जय पाठक, सुनील कुमार विश्वकर्मा,विजय शंकर मिश्र, शिक्षक रविशंकर पाण्डेय, कविगुरु अंजनी कुमार दुबे,छेदी नंदन मिश्र,अशोक कुमार मिश्र,अरविन्द कुमार सिन्हा,जया लक्ष्मी,वन्दना श्रीवास्तव,रणजीत कौर,पुष्पलता कुमारी,आभा मुखर्जी,अवधेश कुमार पाण्डेय,प्रियरंजन पाठक समर्पण,मनीष मिश्र नंदन और पाण्डेय रमेश विद्या नाथ ने भी विभिन्न विषयों पर स्वरचित कविताएँ प्रस्तुत कीं। 

गोष्ठी को सफल बनाने में विद्यासागर शर्मा,अनिल कुमार शर्मा,कौशिक मल्लिक,रमेश पाठक,सुमन मिश्रा,प्रेम प्रकाश दुबे,मानस मिश्रा और विजय कुमार ठाकुर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।धन्यवाद ज्ञापन कवि राकेश कुमार ने किया।