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आनंद कुमार की समस्या के समाधान हेतु प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन झारखंड की कोर कमेटी ने गठित किया पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल


पलामू : प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन झारखंड की एक महत्वपूर्ण कोर कमेटी की बैठक गत शनिवार को स्थानीय होटल माया पैलेस, बैरिया चौक, डाल्टनगंज में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने की। बैठक में संत मरियम किड्स स्कूल, चैनपुर के निदेशक आनंद कुमार द्वारा संगठन को सौंपे गए लिखित आवेदन पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। आवेदन में उन्होंने विद्यालय संचालन से संबंधित उत्पन्न विवाद एवं उससे हुई कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए संगठन से सहयोग एवं न्यायपूर्ण हस्तक्षेप की मांग की थी।

कोर कमेटी के सभी सदस्यों ने मामले के विभिन्न पहलुओं पर गंभीरता से अपने-अपने विचार रखे। विस्तृत चर्चा के उपरांत सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि मामले का शांतिपूर्ण एवं सम्मानजनक समाधान निकालने के उद्देश्य से संगठन की ओर से पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) का गठन किया जाए |  यह प्रतिनिधिमंडल संत मरियम स्कूल के निदेशक श्री अविनाश देव एवं विद्यालय के प्राचार्य श्री कुमार आदर्श से मिलकर आपसी संवाद एवं समन्वय के माध्यम से विवाद का समाधान निकालने का प्रयास करेगा।

गठित पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में निम्नलिखित पदाधिकारी शामिल किए गए हैं सानू सिद्दीकी संरक्षक, अजय श्रीवास्तव  जिलाध्यक्ष,सतीश कुमार  जिला सचिव, आनंद कुमार  कोषाध्यक्ष, चंद्रभूषण सिन्हा  स्टेट कोऑर्डिनेटर। बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के मुख्य संरक्षक एवं संस्थापक अध्यक्ष अविनाश वर्मा ने कहा कि संगठन सदैव अपने सदस्य विद्यालयों के हितों एवं सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कोर कमेटी तथा गठित प्रतिनिधिमंडल दोनों पक्षों के साथ सकारात्मक एवं सौहार्दपूर्ण वार्ता कर इस विवाद का न्यायसंगत एवं स्थायी समाधान निकालने का हरसंभव प्रयास करेंगे।

बैठक में मुख्य रूप से अमित आनंद, विनोद सिंह, प्रमोद पांडेय, वीरेंद्र दुबे, रमाशंकर उपाध्याय, अजमल खान भुट्टो, वीरेंद्र प्रसाद सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन झारखंड ने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि संवाद, पारदर्शिता एवं आपसी समझ के माध्यम से शिक्षा जगत से जुड़े विवादों का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालयी व्यवस्था किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो।