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स्वर्वेद संदेश यात्रा पहुंची पलामू, विहंगम योग समारोह में गूंजा आत्मकल्याण का संदेश


संत प्रवर विज्ञान देव ने कहा—मन की शांति से ही प्रकट होता है आत्मा का वास्तविक प्रकाश
प्रतिनिधि, मेदिनीनगर।
सद्गुरु सदाफल देव विहंगम योग संस्थान की राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश यात्रा गुरुवार को पलामू पहुंची। कन्याकुमारी से शुरू हुई इस यात्रा के पलामू पहुंचने पर श्रद्धालुओं और भक्तजनों में उत्साह, श्रद्धा एवं विश्वास का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर शहर के बीसफूटा पुल रोड स्थित बैजनाथ सिंह सेवा आश्रम परिसर में विहंगम योग समारोह सह ध्यान साधना सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के बाद दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने श्रद्धालुओं को स्वर्वेद कथा का रसपान कराया और आत्मकल्याण के लिए आध्यात्मिक संदेश दिया।
संत प्रवर ने कहा कि ईश्वर की असीम कृपा से मनुष्य को दुर्लभ मानव जीवन प्राप्त हुआ है। प्रत्येक मनुष्य के भीतर ईश्वर की अनंत शक्तियां सूक्ष्म रूप से विद्यमान हैं और आत्मा में ही परमात्मा का वास है। उन्होंने कहा कि अपने भीतर मौजूद अनंत शक्ति का वास्तविक ज्ञान स्वयं को जानने से प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि आज विश्व में व्याप्त अशांति का मूल कारण आंतरिक शांति का अभाव है। मन शांत होने पर ही आत्मा का वास्तविक प्रकाश प्रकट होता है। मन पर नियंत्रण के बिना आध्यात्मिक जीवन में पूर्णता प्राप्त नहीं की जा सकती। विहंगम योग की नियमित साधना से मन को नियंत्रित और शांत किया जा सकता है।
संत प्रवर ने कहा कि स्वर्वेद की वाणी मन के अंधकार को दूर करने का संदेश देती है। उन्होंने विहंगम योग के प्रणेता अमर हिमालय योगी अनंत श्री सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने गहन योग साधना के माध्यम से ईश्वर की प्राप्ति की और इस दुर्लभ आध्यात्मिक ज्ञान को ‘स्वर्वेद’ जैसे अद्वितीय आध्यात्मिक सद्ग्रंथ के रूप में जनमानस के लिए सुलभ कराया।
उन्होंने कहा कि संसार दुख का सागर है, जबकि परमात्मा सुख, शांति और आनंद का स्रोत है। अज्ञानता और मन की चंचलता ही मनुष्य के दुखों का प्रमुख कारण है। उन्होंने आत्मकल्याण और आध्यात्मिक विकास के लिए सद्गुरु की सेवा, नियमित साधना और सत्संग को आवश्यक बताया।
करीब ढाई घंटे तक संत प्रवर की दिव्यवाणी स्वर्वेद कथा के रूप में प्रवाहित होती रही। स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संत प्रवर ने भक्तजनों की सेवा, भक्ति, प्रेम एवं श्रद्धा की भावना के प्रति प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी के मंगलमय और आनंदमय जीवन की कामना की।
समारोह में श्रद्धालुओं से आगामी 14 एवं 15 दिसंबर को वाराणसी में आयोजित समर्पण दीप महोत्सव सह वार्षिकोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया। भक्तजनों ने वार्षिकोत्सव को सफल बनाने का संकल्प लिया।
मौके पर विहंगम योग संस्थान बिहार के रामचंद्र तिवारी, झारखंड के सुरेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह, महामंत्री ललित सिंह, डॉ. पंकज द्विवेदी, उपेंद्रनाथ मिश्रा, नंदलाल पासवान, रवींद्र श्रीवास्तव, मनोरमा द्विवेदी, प्रधान जिला संयोजक भानु प्रताप देव, राम गोविंद यादव, राकेश पाठक, ओंकार नाथ पाठक, मंधर प्रसाद, अखिलेश मेहता, रामपति राम, सौगंध मेहता, दुलारचंद पाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।